यकीन खुद पर इतना रख
देख तेरे बुलंद हौसलें को
डर खुद अपने आप से इतना डर जाये
फ़िर कभी ख़ाब में भी डराने तुझे पास ना आये
याद रख इतना इस संसार में
कमजोरों की कोई पहचान नहीं
लक्ष्य से भटकों का कोई मुक़ाम नहीं
हारी बाज़ी जो जीत में पलट दे
उससे बड़कर कोई पहचान नहीं
जिंदगी के इस रण में
निराशा का कोई मुकाम नहीं
यकीन अगर खुद पर हो तो
सौ सौ चक्रव्यूह भेदना भी नामुमकिन सवाल नहीं
इसीलिए
खुद के भरोसे से ऊपर भगवान भी विराजमान नहीं
देख तेरे बुलंद हौसलें को
डर खुद अपने आप से इतना डर जाये
फ़िर कभी ख़ाब में भी डराने तुझे पास ना आये
याद रख इतना इस संसार में
कमजोरों की कोई पहचान नहीं
लक्ष्य से भटकों का कोई मुक़ाम नहीं
हारी बाज़ी जो जीत में पलट दे
उससे बड़कर कोई पहचान नहीं
जिंदगी के इस रण में
निराशा का कोई मुकाम नहीं
यकीन अगर खुद पर हो तो
सौ सौ चक्रव्यूह भेदना भी नामुमकिन सवाल नहीं
इसीलिए
खुद के भरोसे से ऊपर भगवान भी विराजमान नहीं