Sunday, October 11, 2026

निशान

किस्से उस पनघट के लुका छिपी करे बरगद की बदरी पार l

रंग गयी कागज स्याही दरिया पानी लहरों पतवार के साथ ll


मिट्टी को छू उस चुनर का श्रृंगार बन गया साँझ का गुलाब l

अँगीठी की राख लिख रही कच्चे घड़े उस चाँद का ही नाम ll


मोरनी सी पायलों की झंकार बज रही उड़ते पतंगों के साथ l

गुल गुलमोहर दरख्तों कर रही आसमाँ चाँदनी की ही बात ll


खिलौने मन की सिरहन नाच रही चूडियों खनखनाहट साथ l

लबों छूती बाँसुरी थिरका रही दिल बहते अल्फाजों के राज ll


खुद से फुसफुसाते कर्णफूलों बेनजीर माथे बिंदी का गुलाल l

आँगन ठहरे पदचिन्हों के हिना लाली करतल करते निशान ll

Friday, October 2, 2026

गुनाह

फासले चाँदनी स्पर्श बँधी थी हर जानिब ख्वाहिश राग सी I

सन्नाटे हर लहजे साजिश छवि थी कादंबिनी सर्द रात सी ll

 

सीते सीते दर्द किताब रूह पैबंद सिमटी चटक गांठ सी l

बिखरे आईने एक अपरिचित ताबीर थी अमावस रात सी ll

 

लफ्जों आईने अगन लौ जली गुनाह रंजिश मुराद सी l

दिलों कबूल हुई ना महरूम यादें बिन पानी बरसात सी ll

 

ताउम्र आरजूएँ गुजारी जिस साहिल फरियादी आस सी l

हिना सहर यादें कर्ज भूल गयी घने कोहरे गोधूलि साँझ सी ll

 

सुन खबर जनाजे की रुखसत हो गयी यादें दुल्हन साज सी ll

काफिर को वो कफन पहना गयी बुझा शमा चिता राख सी ll