RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Wednesday, February 4, 2026
पीताम्बरी
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गोधूलि साँझ रिमझिम ओस लटों सेज क्षितिज धरा बेलों लाली से l मिट्टी धागों कायनात निखर आयी थी बुनकर चरखे सायों स्याही से ll कोरे सादे कागज मिथ्...
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Saturday, January 17, 2026
ll धैर्य ll
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हौसला रख संघर्ष कर हर कदम अपने आप से l थकना नहीं रुकना नहीं हार कभी नियति सामने ll कर नजरअंदाज अपूर्णता थाम निपुणता कला हाथ में l लक्ष्य मंज...
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Sunday, January 4, 2026
महासमर
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तहजीब बाजीयाँ मोगरा गुलाब कांटों खुशबुदारी की l कायनात सहर भीगें नयनों अक्स ओस पहरेदारी की ll स्वरांजलि दीप ध्वनि ...
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Sunday, December 21, 2025
पंजरी
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सर्द हवाएँ ख़यालों होले से झूमकौ फुसफुसा गयी एक मिठी सी राग l नाजुक हवाएँ पूछ रही पता उस अक्स तलब जिसकी थी कभी पास ...
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Monday, December 15, 2025
अकेला क्यों
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कुछ फटे बदरंगे अध लिखे पन्ने किताबों के संभाल रखने को दिल करता हैं l इसकी कोई धुंधली तस्वीर जाने क्यों आज भी अक्सर अकेले में बातें करती हैं ...
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