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POEMS BY MANOJ KAYAL

Sunday, June 7, 2026

गुजारिश

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गुजारिश थी मेरी शबनमी मोती बूँदों की बोलती लिखावट कहानी की l सदियाँ ना लगाना कोरे कागज लिखे मौन अल्फाजों सुनने जुबानी सी ll निहारना शहद घुली...
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Thursday, May 21, 2026

वैतरणी

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लाजमी थी गलतफहमियां मधुशाला क़ुरबत आलिंगन हाथ में l मदहोश थी दहलीजें इसकी नजदीकियां अफ़साने आँगन खास में ll रंग ज़माने खुदगर्जीयों के थे बहर...
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Thursday, May 7, 2026

आलिंगन

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तू ही मेरी वो पाठशाला जिस नदी का मैं ठहरा हुआ किनारा l संभली नहीं किताब वो कभी अक्स तेरा जिसमें लगे पुराना ll पेंसिल से नाम मेरा लिख मिटाना ...
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Saturday, April 18, 2026

पारिजात

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अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll ललाट पर बिंदी की वो मो...
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Wednesday, April 8, 2026

अलमारी यादों की

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हृदय वात्सल्य स्पन्दन बादलों कश्ती सवार क़ुरबत खोजे तेरे पहलू पास l एहसास बंदगी आरज़ू फलसफा भूली देख फरिश्तें आयतें गहराई साथ ll खामोश गुजार...
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