RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Sunday, October 11, 2026
निशान
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किस्से उस पनघट के लुका छिपी करे बरगद की बदरी पार l रंग गयी कागज स्याही दरिया पानी लहरों पतवार के साथ ll मिट्टी को छू उस चुनर का श्रृंगार बन ...
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Friday, October 2, 2026
गुनाह
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फासले चाँदनी स्पर्श बँधी थी हर जानिब ख्वाहिश राग सी I सन्नाटे हर लहजे साजिश छवि थी कादंबिनी सर्द रात सी ll सीते ...
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Saturday, September 12, 2026
बिडम्बना
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टीलों घुमावदार रेत धोरों जलते नंगे पैर अंगारों मरहम को I काँटे बबूल सेज लहू गागर चुभती जख्म घाव टिसन को ll बिडम्...
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Tuesday, August 4, 2026
रोती बारिश
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तालीम सावन नयी सीखा गयी नीलामी मुनादी सौदागरी को l रात परछाई बारिश बूँदें बेच आयी रोते खारे आँसू पानी को ll बादलों अमिट छाप थी उसके अर्ध चाँ...
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Thursday, July 2, 2026
काग़ज़ फूल
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खो गयी परछाईं उस अलख जगाते अर्ध चाँद की l पतंग मांझे डोरी उलझ चटकी चरखी पायदान की ll कमसिन बुनियाद कच्चे धागे पिरोई साँझी रात की l आसमाँ धुन...
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