RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Thursday, July 2, 2026
काग़ज़ फूल
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खो गयी परछाईं उस अलख जगाते अर्ध चाँद की l पतंग मांझे डोरी उलझ चटकी चरखी पायदान की ll कमसिन बुनियाद कच्चे धागे पिरोई साँझी रात की l आसमाँ धुन...
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Sunday, June 7, 2026
गुजारिश
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गुजारिश थी मेरी शबनमी मोती बूँदों की बोलती लिखावट कहानी की l सदियाँ ना लगाना कोरे कागज लिखे मौन अल्फाजों सुनने जुबानी सी ll निहारना शहद घुली...
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Thursday, May 21, 2026
वैतरणी
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लाजमी थी गलतफहमियां मधुशाला क़ुरबत आलिंगन हाथ में l मदहोश थी दहलीजें इसकी नजदीकियां अफ़साने आँगन खास में ll रंग ज़माने खुदगर्जीयों के थे बहर...
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Thursday, May 7, 2026
आलिंगन
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तू ही मेरी वो पाठशाला जिस नदी का मैं ठहरा हुआ किनारा l संभली नहीं किताब वो कभी अक्स तेरा जिसमें लगे पुराना ll पेंसिल से नाम मेरा लिख मिटाना ...
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Saturday, April 18, 2026
पारिजात
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अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll ललाट पर बिंदी की वो मो...
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