Friday, October 2, 2026

गुनाह

फासले चाँदनी स्पर्श बँधी थी हर जानिब ख्वाहिश राग सी I

सन्नाटे हर लहजे साजिश छवि थी कादंबिनी सर्द रात सी ll

 

सीते सीते दर्द किताब रूह पैबंद सिमटी चटक गांठ सी l

बिखरे आईने एक अपरिचित ताबीर थी अमावस रात सी ll

 

लफ्जों आईने अगन लौ जली गुनाह रंजिश मुराद सी l

दिलों कबूल हुई ना महरूम यादें बिन पानी बरसात सी ll

 

ताउम्र आरजूएँ गुजारी जिस साहिल फरियादी आस सी l

हिना सहर यादें कर्ज भूल गयी घने कोहरे गोधूलि साँझ सी ll

 

सुन खबर जनाजे की रुखसत हो गयी यादें दुल्हन साज सी ll

काफिर को वो कफन पहना गयी बुझा शमा चिता राख सी ll

 

8 comments:

  1. मार्मिक सृजन ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      आपका उत्साहवर्धन ही मेरी कूची के रंगों की सुनहरी धुप की मीठी बारिश हैं, आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 3 अक्टूबर 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आदरणीया पम्मी दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए तहे दिल से आपका आभार

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    1. आदरणीय सुशील भाई साब
      आपकातहे दिल से धन्यवाद

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  4. ताउम्र आरजूएँ गुजारी जिस साहिल फरियादी आस सी l

    हिना सहर यादें कर्ज भूल गयी घने कोहरे गोधूलि साँझ सी ll
    बहुत सुन्दर सृजन।

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    1. आदरणीया सुधा दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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