किस्से उस पनघट के लुका छिपी करे बरगद की बदरी पार l
रंग गयी कागज स्याही दरिया पानी लहरों पतवार के साथ ll
मिट्टी को छू उस चुनर का श्रृंगार बन गया साँझ का गुलाब l
अँगीठी की राख लिख रही कच्चे घड़े उस चाँद का ही नाम ll
मोरनी सी पायलों की झंकार बज रही उड़ते पतंगों के साथ l
गुल गुलमोहर दरख्तों कर रही आसमाँ चाँदनी की ही बात ll
खिलौने मन की सिरहन नाच रही चूडियों खनखनाहट साथ l
लबों छूती बाँसुरी थिरका रही दिल बहते अल्फाजों के राज ll
खुद से फुसफुसाते कर्णफूलों बेनजीर माथे बिंदी का गुलाल l
आँगन ठहरे पदचिन्हों के हिना लाली करतल करते निशान ll
सुन्दर पंक्तियाँ !
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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