RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Monday, July 26, 2010
मेरे बच्चे
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फक्र है नाज है नहीं है अहंकार मेरे बच्चे है मेरे सर के ताज मगरूर नहीं खुश हूँ कुदरत ने दिए दो छोटे से फूल मुझे उपहार दिखे बचपन इन में मेरा ...
आसरा
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इस उम्र अब नए शहर क्या पहचान मिलेगी काटे नहीं जिन्दगी कटेगी आसरा है बस एक यादों के सहारे तारे गिन गिन राते कटेगी दौर यह अकेलेपन का भी गुजर ज...
वर्षा रानी
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छम छम बरसा पानी फिर आयी वर्षा रानी छाई सावन की हरयाली उमड़ आयी मौजो की मस्ती निकल आये सागर से मोती कूके पपहिया नाचे मोर छाई ऐसी घटा निराली छम...
Sunday, July 25, 2010
दूर
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संभल पाती सहज पाती जिन्दगी दबे पावँ ख़ामोशी से चली आयी एक खबर आहिस्ते से दी दिल पे दस्तक मुसाफिर तेरी मंजिल है अभी दूर मत बुन सपने आशियाँ के ...
नया बसेरा
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अलविदा कह चल पड़े एक नयी जगह एक नया आशियाँ बसाने परिंदे उड़ चले बसेरा था सुन्दर वही गुजरा था बचपन जहा कभी पर नियति ने लिखा था कुछ ओर तोड़ पिंजर...
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