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POEMS BY MANOJ KAYAL

Monday, March 21, 2016

मर्ज़

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हवा न जाने कौन सी छू गयी मर्ज़ इश्क़ का हमको दे गयी खिलते गुलाब सा मुखड़ा जैसे सौगात में दे गयी जालिम बदल फ़िर फिजाँ की बयार रुख से न...
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Thursday, March 3, 2016

लफ्ज़

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अधरों को मेरे लफ्ज़ अगर मिल जाते करने हर खाब्ब को सच पर लगा के वो उड़ जाते ठहर ना पाती बात इसी तलक क्योंकि, सितारों की महफ़िल से निकल ...
2 comments:
Wednesday, March 2, 2016

कोहराम

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बड़ी मनहूस थी वो रात छूट गया जब तेरा मेरा साथ बदलते हालातों की थी ए आग भस्म हो गयी जिसमें रिश्तों की बुनियाद गुम हो गयी वो थी प्यार ...
Sunday, February 14, 2016

जीना

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तू गुज़रे कल की बात ना कर आने वाले कल की बात कर सँवर जाएगा मुकद्दर वक़्त को हमसफ़र बना के चल तस्वीर फ़िर रंग जायेगी महफ़िल क़ामयाबी की ...

सुरा के रंग

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बात जो मदिरालय की पुकार में ना वो मस्जिद की अजान में ना वो मंदिर के भगवान में छू लेती है दिल को इसकी जो बात यहाँ नहीं कोई महजब की द...
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