Tuesday, August 4, 2026

रोती बारिश

तालीम सावन नयी सीखा गयी नीलामी मुनादी सौदागरी को l

रात परछाई बारिश बूँदें बेच आयी रोते खारे आँसू पानी को ll


बादलों अमिट छाप थी उसके अर्ध चाँद हुनरमंद कलाकारी को l

मोल समझ ना पायी जुल्फें इसकी पलकों रिसते खारे पानी को ll


बिन रूह जिस्म को भा गयी तंग गलियाँ इसके आँगन को l

दागों अनगिनत पैबंद कढ़ी इसके एकांकी एकांत साये को ll


किनारा कर आसमाँ आँचल बाँध दिया रोती बारिश यादों तन्हाई को l

टकरा काँच दीवारों से थम गया शोर इसका उफनते बारिश पानी को ll


नजरबंद थी तमाशबीन रोती आँसू आँखें सावन की परछाई को l

चाँद शांत हृदय भीगता रहा ताउम्र अपने ही खुदगर्ज फ़साने को ll

9 comments:

  1. मार्मिक भावाभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      आपका तहे दिल से शुक्रिया

      Delete
  2. रचना में उचित जगह अर्ध विराम लगायें, अभी समझने में दिक्क्त हो रही है

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीया अनीता दीदी जी
      त्रुटि और ध्यान आकर्षण करने के लिए आपका धन्यवाद, आगे से कोशिश होगी ऐसी गलती वापसी ना हो

      Delete
  3. Replies
    1. आदरणीय हरीश भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

      Delete
  4. बहुत सुन्दर भावपूर्ण सृजन ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीया सुधा दीदी जी
      आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

      Delete
  5. आदरणीया सुधा दीदी जी
    आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

    ReplyDelete