फासले चाँदनी स्पर्श बँधी थी हर जानिब ख्वाहिश राग सी I
सन्नाटे हर लहजे साजिश छवि थी कादंबिनी सर्द रात सी ll
सीते सीते दर्द किताब रूह पैबंद सिमटी चटक गांठ सी l
बिखरे आईने एक अपरिचित ताबीर थी अमावस रात सी ll
लफ्जों आईने अगन लौ जली गुनाह रंजिश मुराद सी l
दिलों कबूल हुई ना महरूम यादें बिन पानी बरसात सी ll
ताउम्र आरजूएँ गुजारी जिस साहिल फरियादी आस सी l
हिना सहर यादें कर्ज भूल गयी घने कोहरे गोधूलि साँझ सी ll
सुन खबर जनाजे की रुखसत हो गयी यादें दुल्हन साज सी ll
काफिर को वो कफन पहना गयी बुझा शमा चिता राख सी ll
मार्मिक सृजन ।
ReplyDeleteआदरणीया मीना दीदी जी
Deleteआपका उत्साहवर्धन ही मेरी कूची के रंगों की सुनहरी धुप की मीठी बारिश हैं, आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 3 अक्टूबर 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
आदरणीया पम्मी दीदी जी
Deleteमेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए तहे दिल से आपका आभार
सुंदर
ReplyDeleteआदरणीय सुशील भाई साब
Deleteआपकातहे दिल से धन्यवाद
ताउम्र आरजूएँ गुजारी जिस साहिल फरियादी आस सी l
ReplyDeleteहिना सहर यादें कर्ज भूल गयी घने कोहरे गोधूलि साँझ सी ll
बहुत सुन्दर सृजन।
आदरणीया सुधा दीदी जी
Deleteह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं