Tuesday, December 26, 2017

इत्र सी हसरतें

हसरतें कुछ ऐसी पाल ली मैंने

अंगारों से जैसे दोस्ती करली मैंने

दहकते शोलों की चिंगारियां

लपटों की ज्वाला बन भभक आयी जैसे  

अब ओ आसमां मंज़िल ना थी मेरी जैसे

भरने अधूरेपन को

लगन की कवायद संग थी जैसे मेरे

आतुर थी लालसायें मेरी

छूने विषमताओं की जिज्ञासायें मेरी

बदल गयी थी दुनिया मेरी सारी

फिजाओं की बयार में घुल रही थी

इत्र सी हसरतें जैसे मेरी सारी 

इत्र सी हसरतें जैसे मेरी सारी


Tuesday, December 19, 2017

मेरी कहानी

फुर्सत मिले कभी तो ए ख़ुदा

तुम भी पढ़ना मेरी कहानी की मोड़

छूने सपनों को बेचैन रहती थी

कभी मेरी भी अल्हड़ जिंदगानी की सोच

पर वक़्त ने समय से पहले ही काट दी थी

इनके उड़ते पतंगों की डोर

ढल गया था रक्तरंजित सा सूर्य

छिपाये क्षितिज में गुमनामी की ओट

मक़सद पास फ़िर जीने को रहा नहीं

इसलिए हिसाब तुझसे करने

लिख डाली मैंने अपनी कहानी की छोर

फुर्सत मिले कभी तो ए ख़ुदा

तुम भी पढ़ना मेरी कहानी की मोड़

तुम भी पढ़ना मेरी कहानी की मोड़







 

Thursday, December 14, 2017

गुमनाम हसरतें

गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो

ऐ जिंदगी कुछ सब्र करो

फ़कीरी कहीं तमाशा ना बन जाए

चादर मैली समझ किस्मत ठुकरा ना जाए

गुजारिश इसलिए बस इतनी सी हैं

उन गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो

ऐ जिंदगी एक पल को तो ठहरो

कहीं बेपनाह अरमानों के गागर से

अश्कों के सागर छलक ना जाए

महफ़ूज हैं अब तलक जो दिलों के अंदर

रोशन कुछ पल उन्हें ओर रहने दो

ऐ जिंदगी जब तलक संभल ना जाऊ

उन गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो

उन गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो