Friday, April 2, 2021

पनघट

देख चाँद की हिरणी सी मतवाली चाल l
शरमा पनघट करली घूँघट आट ll

आँख मिचौली नज़र नायाब l
बादलों की ओट छिप रहा महताब ll 

बिंदिया सा सज रहा पनघट के ललाट l
प्रतिबिम्ब निखर रहा दरिया के गाल ll

उड़ रहा घूँघट आँचल दामन थाम l
बरस रही बदरी भींग रहा आफताब साथ ll 

झुक गयी पलकें लज्जा गया पनघट ताज l
आसमां से धरती उतर आया दिल का चाँद ll

दरिया के उस छोर चाँद और पनघट साथ l
रास की रात सितारों संग चला आया चाँद ll

देख चाँद की हिरणी सी मतवाली चाल l
शरमा पनघट करली घूँघट आट ll