Friday, July 7, 2023

शिकवा

अदना सा ख्याल यूँ ही जाने क्यों मन को भा गया l

गुफ़्तगू इश्क की खुद से भी कर लिया करूँ कभी ll


गुजरु जब फिर यादों की उन तंग गलियों से कभी l

जी लूँ हर वो लम्हा उम्र जहां आ ठहरी थी कभी ll


हँसूँ खुल कर मिल कर खुद से इसके बाद जब कभी l

झुर्रियों चेहरे की सफ़ेदी बालों की इतराने लगे खुशी ll


अन्तर फर्क़ करूँ उन लिफाफों में कैसे फिर कभी l

सूखे गुलाब आज भी जब महक रहे ताजे से वहीं ll


संवारू निहारूं जब जब दर्पण फुर्सत लम्हों में कभी l

परछाईं झलक इश्क की भी शिकवा और ना करे कभी ll