Tuesday, June 5, 2018

पहचान

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

बिछड़ गया था जो लडकप्पन जिंदगी की रफ़्तार में

उस बचपन को एक बार फ़िर से गले लगा दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

तन्हा अकेला खड़ा हूँ अपनों की इस भीड़ में

गैरों में ही सही पर अपनों की पहचान करवाँ दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

खो गया हूँ संसार के जिस शून्य भँवर में

खोई हुई उस चेतना हृदय को फ़िर से जगा दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

इस जिंदगी को मरघट पड़ाव भी हसतें हसतें मिल जाये

गुमशुदा इस जीवन को जिंदादिली की ऐसी पहचान दिला दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

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