Wednesday, February 21, 2018

महफ़िल

दिल कह रहा हैं

आज फिर एक बार

महफ़िल तेरी यादों के रंगों से सजा दूँ

टूटे दिल को फ़िर से

प्यार के रंगों से सजा दूँ

हमसफ़र बस  इतना तू जान ले

मगरूर ना थी आशिक़ी हमारी

पर देख ख़फ़ा नज़रें तुम्हारी

तन्हा रह गयी दीवानगी हमारी

तू मेरी छाया मैं तेरा दर्पण

तू मेरी साज़ मैं तेरा सरगम

दिल कह रहा हैं

एक बार फ़िर  से

महफ़िल में गीत यह गुनगुना दूँ

और तेरी हसीं के रंगों से

आज एक बार फ़िर महफ़िल सजा दूँ

एक बार फ़िर महफ़िल सजा दूँ 

Thursday, February 15, 2018

इबादत

बदरंग थी इबादत हमारी

लहू का रंग जो उसे मिला

निखर बन गयी क़यामत भारी

मंत्र मुग्ध हो

झुक गयी कायनत भी सारी

हृदय स्पर्शी मर्माहत ढाल ऐसी बन गयी

ढल नये आयाम में

जैसे सुन्दर आयतें गढ़ गयी

मानों लहू से लिखे कलमें से  

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी


Wednesday, February 14, 2018

यारी हमारी

कोशिशें बहुत की

मुड़ कर जाते कदमों को रोक लूँ

पर कह न पाया दिल की जो बात

रुख उनकी हवाओं का कैसे मोड़ दूँ

लफ्ज़ जाने आज क्यों इतने पराये हो गए

लबों पे आते आते बेगाने हो गए

पलट गयी थी अब दिल की हर बाज़ी

कर रुखसत चुपके से यारी हमारी

यारी हमारी

Thursday, February 1, 2018

मौका

मशग़ूल रहा मैं जिंदगी की दौड़ भाग में

गुफ्तगूँ कभी कर ना पाया अपने आप से

वक़्त मेरे लिए ठहर पाया नहीं

गुजर गयी जिंदगी जैसे घुँघरू की ताल पर

सोचा कभी साक्षातार करलूँ जीवन आत्मसात से

थिरकने फिर इसकी धुन पर

चल पड़ा मैं

कभी मधुशाला की चाल पर

कभी मंदिर मस्जिद की ताल पर

रूबरू फिर भी हो ना पाया अपने आप से

मंजर इसका बयाँ कैसे करुँ समझ ये कभी पाया नहीं

नापाक खुदगर्जी सी लगने लगी

बटोरी थी अब तलक जो शौहरतें

कसक बस एक इतनी सी रह गयी

मिलने खुद से

ललक अधूरी यूँ रह सी गयी

निर्वृत हो जाऊँ अब मोह माया जाल से

गले लिपट रो सकूँ अंत में अपने आप से

कशिश कही यह अधूरी रह ना जाए

इसलिए जिंदगी बस एक मौका ओर दे दे

ताकि सकून से

गुफ्तगूँ कर पाऊँ अपने आप से

अपने आप से