Wednesday, June 20, 2018

लिबास

रूह ने मेरी लिबास बदल लिया

सौगात मोहब्बत की क्या मिली

दिल को तेरे अपना आशियाना बना लिया

मशरूफ़ थी जो जिंदगी

कभी अपने आप में

आज तारुफ़ को तेरी

अपने जीने को सहारा बना लिया

सच कहुँ तो

अजनबी हो गया हूँ अपने आप से

ख़ुदा जब से तुम्हें मान लिया

बदल गयी जिंदगानी मेरी

रूह ने मेरी लिबास जब से तेरा ओढ़ लिया

लिबास जब से तेरा ओढ़ लिया  

Saturday, June 9, 2018

तन्हाइयों के पैगाम

ऐ शाम क्यों तुम तन्हाइयों के पैगाम लाती हो

ना सितारों की बारात ना चन्दा का साथ

फ़िर क्यों करवटों में सपने सँजोती हो

दिन ठहरता नहीं रात गुजरती नहीं

क्यों फ़िर तुम इन अधखुली पलकों को जगाती हो

कर्जदार बना मुझे नींदों का

सौदागिरी क्यों अपने सपनों की दिखलाती हो

ख्वाईसों के कुछ अंश जो अभी बाकी हैं

इशारों ही इशारों में

बेपर्दा क्यों तुम उन्हें कर जाती हो

महरूम कर मुझे अपने आप से

ढ़लते पहर के साथ निन्दियाँ क्यों तुम चुरा ले जाती हो

ऐ शाम क्यों तुम तन्हाइयों के पैगाम लाती हो

तन्हाइयों के पैगाम लाती हो








Tuesday, June 5, 2018

पहचान

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

बिछड़ गया था जो लडकप्पन जिंदगी की रफ़्तार में

उस बचपन को एक बार फ़िर से गले लगा दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

तन्हा अकेला खड़ा हूँ अपनों की इस भीड़ में

गैरों में ही सही पर अपनों की पहचान करवाँ दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

खो गया हूँ संसार के जिस शून्य भँवर में

खोई हुई उस चेतना हृदय को फ़िर से जगा दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

इस जिंदगी को मरघट पड़ाव भी हसतें हसतें मिल जाये

गुमशुदा इस जीवन को जिंदादिली की ऐसी पहचान दिला दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे

ऐ ख़ुदा एक बार तू मुझें अपने आप से रूबरू करवाँ दे