Monday, February 11, 2019

मायूस मुस्कान

हर लम्हा लम्हा मुस्कराता रहा

ख़ुद में ख़ुद को तलाशता रहा

अनजाना था बेगाना था खुद से

मुस्कान में दर्द छिपता रहा

मिल जाए कोई पहचान शायद

इस दर्द को पढ़ ले कोई आकर

छू ले कोई अज़नबी यह अहसास

और जोड़ दे टूटे दिलों के तार

मिल जाए इसे किसी किनारे का साथ

कब तलक जिन्दा रह पाऊँगा

रूह बदलती अज़नबी साँसों के साथ

बह ना जाए खो ना जाए

भावनाओं के सैलाब में

इन मर्मस्पर्शी मुस्कानों के अहसास

उड़ ना जाए रँगत कहीं इसकी

रखना हैं इन ख्यालों को बरक़रार

बस इसलिए सजी रहे मायूस चेहरे पर भी

हर पल दिल को छू लेने वाली मुस्कान  

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (13-02-2019) को "आलिंगन उपहार" (चर्चा अंक-3246) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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