Friday, January 31, 2020

याददाश्त

तेरी यादों के चिलमन को छोड़ 

बाक़ी याददाश्त खाली खाली हैं 

ओ रहगुज़र हमसफ़र 

इन आँखों में नींद कम 

तेरे इश्क़ की ख़ुमारी भारी हैं 

किताबों के पुराने सूखे फूलों में 

तेरी यादों की महक आज भी बाकी हैं 

यादों के झरोखे में बस तेरे नूर की ही चाँदनी हैं 

बाकी याददाश्त तो बस खाली खाली हैं 

समझौते हैं कुछ बदनाम राहों के 

किस्से हैं कुछ इश्क़ की गालियारों के 

अरमान फिर भी सजे हैं तेरी ही यादों के 

फरियाद अब ओर नहीं यादों की 

छोड़ तेरी चिलमन को याद नहीं यादों की  

Wednesday, January 29, 2020

शामें

गीत ग़ज़लों मैं अपनी शामें आबाद करता हूँ

आफ़ताब के सुनहरे नूर को

चाहतों का पैगाम लिखता हूँ

ख्यालों से निकल आँखों में उतर आयी

उस महजबी को सलाम लिखता हूँ

गुले गुलशन एहतराम लिखता हूँ

काफ़िले तारुफ़ के तरानों में

नजरानों की सौगात लिखता हूँ

इन बेजान धड़कनों से

उस पाक ए रूह को फ़रियाद लिखता हूँ

सारी सारी रात करवटों में

खुद से खुद बात करता हूँ

सुरमई छुईमुई उसकी पलकों में

नींदे अपनी तलाश करता हूँ 

गीत ग़ज़लों मैं अपनी शामें आबाद करता हूँ

Thursday, January 9, 2020

मधुमास

बेवफ़ाई की आँधी नजरों के आगे

ढाह गयी गर्द का अंबार

सुबह की सुनहरी धूप को

ग्रहण लगा बना गयी अमावस की रात

ग़म की तन्हाई सिर्फ़ अश्रु मंजरों का साथ

 ना कोई तारे ना ही सितरों का पैगाम

काफ़ूर हो गया नशा इश्क़ का

मदहोश सुरूर आया ना कोई काम

सहेली साँझ की थमा गयी हाथों में जाम

पर पैसों की खनक में खो गयी

दिलबरों के रूह के मिलन की रात

खुदगर्ज बन नीलाम होती वफ़ा चाहते

हरम की गलीयों सा विचलित कर गयी मधुमास

हरम की गलीयों सा विचलित कर गयी मधुमास