Friday, September 4, 2009
जुस्तजू
जीने की तमना ओर ना रही
छलकते जाम बीच
तुझे भूल जाने की कोशिश की
साकी की मदहोशी भी
तेरा चेहरा भुला ना पाई
नशे बीच भी तेरी जुस्तजू चली आई
भुलाऊ कैसे यह बात समझ ना आई
गुलाब का फूल
डाली डाली बूटा बूटा
खिले है गुलाब के फूल
तना तना पता पता
निकल रहे काँटो के नीड़
पल पल घड़ी घड़ी
बदल रहा कलियों का रूप
कलि कलि खिल खिल
बन रही गुलाब का फूल
छोटे छोटे दिलो के बड़े बड़े अरमान
छोटे छोटे दिलो के बड़े बड़े अरमान
हसरते चूमने आसमा की
खुली आँखों में सपने सजाने की
हवाओ में खाबो के महल बनाने की
कभी हँसने की कभी हसाने की
हर चाहत में मंजिल को पाने की
मंजिल मिले या ना मिले
रोज एक नई सपनो की दुनिया बसाने की
छोटे छोटे दिलो के बड़े बड़े अरमान
गुमनामी
वो पल भी आयेगा
जब हम ना होंगे
सिर्फ़ यादे होंगी
दिल की किताबो में
दफ़न एक अध्याय होगा
एक भूली दास्ता होगी
समय के साथ साथ
गर्त से ढकी किताब होगी
मानस पटल पर ना कोई छाप होगी
सिर्फ़ गुमनामी की गलिया में
खोई एक ओर कहानी होगी
अंकुरित
सुहानी फिजा चली आई
चमन लगा महकने
कलिया लगी खिलने
भवरे लगे गुंजन करने
पंछी लगे चहकने
आसमा लगे विचरने
करवट लेने लगी जिन्दगी
बीज अंकुरित होने लगे नए