Friday, July 24, 2015

एक नई कहानी

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

दर्द में डूबी दास्ताँ को

आंसुओं का आसरा देता हैं

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

लहूलुहान जिंदगानी के ताने बाने में

फिर से जिन्दगी तलाश करता है

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

नफ़रत की इस पटककथा में भी

प्यार के बीज पिरतों हैं

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं



Saturday, July 18, 2015

अधरों पे

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

जलती है जब शमा

परवाना मचल जाता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

झुक जाती है नजरें

नूर तेरा जब नजर आता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

थम जाती है साँसे

हिजाब तेरा जब सरक जाता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

मोड़

वो मोड़ कुछ ओर था

ये मोड़ कुछ ओर है

तू खाब्बों की ताबीर थी

मैं गुनाहों की तस्वीर था

फ़ासलों के इस दरमियाँ भी

डोर कोई अनजानी बँधी थी

पर इस मुक़ाम को

मंजिल की कहा सौगात थी

तस्वीर के इस पहलू  को

रंगों से जैसे कोई नाराजगी थी

मानों खफा हो दिल की वादियाँ

अधूरी साँसों में

धड़कने टटोल रही थी

साक्षी थी जो वफ़ा की

बानगी उसकी तलाश रही थी

पर उजड़ चुका था घरौंदा

मगर दिल को ये खबर तक ना थी

मगर दिल को ये खबर तक ना थी

Tuesday, June 16, 2015

वात्सल्य

वात्सल्य की ख़ोज में

निकला हुँ अनजानी मोड़ पे

छू ले कोई मर्मस्पर्शी चेतना आख़िर

स्पंदन से जिसके जग जाए

वात्सलय भावना सारी

ना कोई वेदना हो

ना कोई संवेदना हो

सिर्फ़ वात्सलय का आगाज़ हो

आवेग में जिसकी

रूह को सुकून का अहसास हो

इंद्रधनुषी रंगो से सुसज्जित

वात्सलय की इस अनुभूति में

आत्मा से परमात्मा एकाकार हो

आत्मा से परमात्मा एकाकार हो

Friday, May 15, 2015

जुगलबंदी

जुगलबंदी जब मेरी तेरी होगी

प्यार के तरानों की

स्वर लहरियाँ तब गूँजेगी

दिलों की इस जुगलबंदी में

सिर्फ प्रेम गीतों की लड़ियाँ होगी

संगम ऐसा होगा

जैसे स्वर और ताल की कड़ियाँ होगी

मैं और तुम से हम की सुन्दर रचना होगी

एकाकार सरगम की जैसे

सुहानी रिमझिम बरसात होगी

जुगलबंदी जब मेरी तेरी होगी

प्यार के तरानों की

स्वर लहरियाँ तब गूँजेगी

स्वर लहरियाँ तब गूँजेगी