खट्टास जंग की परत ऐसी जमी जिंदगानी पर l
चाबी रिश्तों की अलग हो गयी गुच्छे की पहरेदारी पर ll
बड़ी सिद्धत से सँवारा सहेजा जिस रिश्ते को l
हिफाज़त ही गुनाह बन गयी उसकी नजाकत को ll
सहज बेबाक पतंगों से उड़ते रहते थे जो रिश्ते l
डोर उसकी ही उलझ कट गयी अपने ही माँझे से ll
लाख जतन की मिट्टी महकती रहे इसकी की कोमल राहों की l
फूलों से सजी रहे पगडण्डी इसकी राहोँ की ll
खुदा भी ख़ौफ़ज़दा हो गया इसके चिंतन क्रोध के आगे l
तल्खी में चादर नकाब की बैरी बन जब इसने ओढ़ ली ll
गुरुर था जिस रिश्ते को नफ़ासत अंदाज़ से जीने का l
मगरूर बन बिफर गया आसमां उसके कोने कोने का ll
हिसाब अधूरा रह गया कुछ खोने और पाने का l
सवाल अटक गया बेहिसाब जज्बातों का ll
प्रायश्चित करूँ कैसे अनवरत बह रहे अश्कों का l
निरुत्तर वो मौन है सजदा रिश्तों के रखवालों का ll
प्रायश्चित करूँ कैसे अनवरत बह रहे अश्कों का l
निरुत्तर वो मौन है सजदा रिश्तों के रखवालों का ll
चाबी रिश्तों की अलग हो गयी गुच्छे की पहरेदारी पर ll
बड़ी सिद्धत से सँवारा सहेजा जिस रिश्ते को l
हिफाज़त ही गुनाह बन गयी उसकी नजाकत को ll
सहज बेबाक पतंगों से उड़ते रहते थे जो रिश्ते l
डोर उसकी ही उलझ कट गयी अपने ही माँझे से ll
लाख जतन की मिट्टी महकती रहे इसकी की कोमल राहों की l
फूलों से सजी रहे पगडण्डी इसकी राहोँ की ll
खुदा भी ख़ौफ़ज़दा हो गया इसके चिंतन क्रोध के आगे l
तल्खी में चादर नकाब की बैरी बन जब इसने ओढ़ ली ll
गुरुर था जिस रिश्ते को नफ़ासत अंदाज़ से जीने का l
मगरूर बन बिफर गया आसमां उसके कोने कोने का ll
हिसाब अधूरा रह गया कुछ खोने और पाने का l
सवाल अटक गया बेहिसाब जज्बातों का ll
प्रायश्चित करूँ कैसे अनवरत बह रहे अश्कों का l
निरुत्तर वो मौन है सजदा रिश्तों के रखवालों का ll
प्रायश्चित करूँ कैसे अनवरत बह रहे अश्कों का l
निरुत्तर वो मौन है सजदा रिश्तों के रखवालों का ll