Tuesday, October 30, 2012

नफरत

नफरत का कोहरा ऐसा छाया

विलुप्त हो गयी प्यार की भाषा

अपने ही अपनों के दुश्मन

घृणा होड़ का पसरा ऐसा साया

तरकश कटारी बाण से ज्यादा

पैनी हो गयी जुबाँ की भाषा

यकीन एतबार का उठ गया साया

नफरत का जो तूफां आया

पसर गयी जैसे अमवास की छाया

छंट गया जैसे विश्वास का साया

सही गलत सब हो गए बेमान

हर इंसां हो गया नफरत का शिकार

जमीर की तो अब करो ना बात

लहू हो गया पानी सामान 

दीवाना

मयिअत पे हमारी रोने तुम ना आना

पता जमाने को चल जाएगा

दीवानों की फेहरिस्त में

एक नाम और जुड़ जाएगा

जनाजे को तुम कांधा ना लगाना

माहौल मातम का

आंसुओ का सैलाब बन जाएगा

कब्र पे हमारी तुम कभी ना आना

अश्क तुम्हारे नयनो में देख नहीं पायेंगे

गुजारिश हमारी कबूल फरमाना

ख्वाइश आखरी हमारी

पूरी कर जाना तुम

कब्र पे हमारी

दीवाना नाम लिखवा देना तुम



 

Monday, October 29, 2012

बेजुबाँ

दिल की हसरतों को काश हवा दे पाते

मोहब्बत को अपनी जुबाँ दे पाते

तेरे ख्यालों की ताबीर बुना करते थे

काश तुमको ये बतला पाते

पाक ऐ बेनजीर थी चाहत

तुमको ये समझा पाते

मोहब्बत को अपनी जुबाँ दे पाते

चाहा सिर्फ तुम्हे

तुमको ये अहसास करा पाते

हर साँसों पे लिखा तेरा ही नाम

तुमको ये दिखला पाते

मोहब्बत को अपनी जुबाँ दे पाते

तुम थी मेरी दुआ

फ़रियाद तुम्हे ये सुना पाते

मोहब्बत को अपनी जुबाँ दे पाते

दिल की हसरतों को काश हवा दे पाते

मोहब्बत को अपनी जुबाँ दे पाते

पुरानी पहचान

धडकनों से दिल की पहचान पुरानी है

तेरे ख्यालों से दिल की गिटार बजे

अहसास ये रूमानी है

धडकनों से दिल की पहचान पुरानी है

तेरी साँसों से सजे धडकनों की साज

ख्याल ये बड़ा ही रूमानी है

धडकनों से दिल की पहचान पुरानी है

धडकनों से दिल की पहचान पुरानी है

Saturday, October 27, 2012

रूमानी रंग

जिन रंगों में जिया करते थे

उन रंगों से नाता तोड़ लिया

बात रंगों में अब वो ना थी

मुस्कान उनमें अब पहली सी ना थी

बदल गयी थी तस्वीर पुरानी

श्याम स्वेत हो गयी थी जिन्दगी बेचारी

लाचारी थी यह बड़ी भारी

रंगों ने बिगाड़ दी थी तस्वीर की कहानी

अधिक रंगों के पुट से

बदरंग हो गयी थी जिन्दगी बेचारी

रंग अब जीवन से दूर थे

पर श्याम स्वेत भी कहा रूमानी कम थे