Thursday, January 9, 2020

मधुमास

बेवफ़ाई की आँधी नजरों के आगे

ढाह गयी गर्द का अंबार

सुबह की सुनहरी धूप को

ग्रहण लगा बना गयी अमावस की रात

ग़म की तन्हाई सिर्फ़ अश्रु मंजरों का साथ

 ना कोई तारे ना ही सितरों का पैगाम

काफ़ूर हो गया नशा इश्क़ का

मदहोश सुरूर आया ना कोई काम

सहेली साँझ की थमा गयी हाथों में जाम

पर पैसों की खनक में खो गयी

दिलबरों के रूह के मिलन की रात

खुदगर्ज बन नीलाम होती वफ़ा चाहते

हरम की गलीयों सा विचलित कर गयी मधुमास

हरम की गलीयों सा विचलित कर गयी मधुमास

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