Saturday, May 4, 2019

सपनों की कश्ती

बारिश बिन तेरे अधूरी हैं

भीगूँ कैसे

आँचल से तेरे दुरी हैं

बूंदों में इसके

तेरे तपिश की जमीं हैं

फूलों के कपोल पे जैसे

मोतियों सी लड़ जड़ी हैं

फ़ुहारों ने इसकी समेटी

यादों की अपनी बस्ती हैं

पर फ़लक से आसमां तक

तेरे ही रंगों की मस्ती हैं

दिल आतुर मिलने तरसे

बारिश की बूंदों में ढूंढ़े

अपने सपनों की कश्ती हैं

अपने सपनों की कश्ती हैं 

2 comments:

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