Friday, April 2, 2021

पनघट

देख चाँद की हिरणी सी मतवाली चाल l
शरमा पनघट करली घूँघट आट ll

आँख मिचौली नज़र नायाब l
बादलों की ओट छिप रहा महताब ll 

बिंदिया सा सज रहा पनघट के ललाट l
प्रतिबिम्ब निखर रहा दरिया के गाल ll

उड़ रहा घूँघट आँचल दामन थाम l
बरस रही बदरी भींग रहा आफताब साथ ll 

झुक गयी पलकें लज्जा गया पनघट ताज l
आसमां से धरती उतर आया दिल का चाँद ll

दरिया के उस छोर चाँद और पनघट साथ l
रास की रात सितारों संग चला आया चाँद ll

देख चाँद की हिरणी सी मतवाली चाल l
शरमा पनघट करली घूँघट आट ll

17 comments:

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  2. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति । हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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    1. आदरणीया अमृता दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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  3. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (04-04-2021) को   "गलतफहमी"  (चर्चा अंक-4026)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    1. आदरणीय शास्त्री सर
      हौशला अफ़ज़ाई एवं मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए दिल से धन्यवाद
      आभार

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  5. बहुत अच्छी रचना की है मनोज जी आपने । सीधे आपके हृदय के तल से उठी मालूम होती है ।

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    1. आदरणीय जीतेन्द्र भाई साब
      सच कहुँ तो गुज़रे लम्हे तस्वीर बन उभर आते है , शब्द कम है आपका शुक्रिया कहने को, दिल से आभार

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  6. मन के भावों को उतार दिया है ।सुंदर

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    1. आदरणीया संगीता दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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  7. सुंदर भावों को खूबसूरती से लिखा है आपने,नायाब अभिव्यक्ति ।

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    1. आदरणीया जिज्ञासा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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  8. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय रचना

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    1. आदरणीय आलोक जी
      हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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  9. पनघट को प्रतीक रख सुंदर श्रृंगार सृजन किया हैं आपने।
    सुंदर उपमाएं।

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    1. आदरणीया कुसुम दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से शुक्रिया
      सादर

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