Wednesday, June 23, 2021

पैबंद

सुनके उनकी मीठी मीठी बातों को l
बैठ गया पिरोनें रिश्ते धागों को ll

कशीदें अदाकारी हुनर साजों से l
छुपा लूँ पैबंद उलझे धागों से ll

रफ़ू कर फ़िर सी लूँ उन रिश्तों को l
तार तार कर गयी वो जिन रिश्तों को ll 

चुभ रही एक कसक ज़िस्म कोने में l
छलनी हो रही अंगुलियाँ इन्हें सिने में ll 

सिते सिते पैबंद भूल गया पिरोने धागों से l
रिश्तों के धागे सुई की उस महीन कमान में ll

रिहाई ना थी टूटी रिश्तों जंजीरों बाँध से l
जकड़ रखी थी कुछ बंदिशों ने मनोभाव से ll 

रफ़ू हो हो वो बिखर गए पैबंद टाट में l
दुरस्त कर ना पाया इन्हें उलझे तार से ll 

22 comments:

  1. रफ़ू कर फ़िर सी लूँ उन रिश्तों को l
    तार तार कर गयी वो जिन रिश्तों को ll

    एक से सिलने से कितने जुड़ पायेंगे ये रिश्ते
    बहुत ही सुन्दर...हृदयस्पर्शी सृजन।

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    1. आदरणीया सुधा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24-06-2021को चर्चा – 4,105 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

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    1. आदरणीय दिलबागसिंह जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए शुक्रिया
      सादर

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  3. रफ़ू हो हो वो बिखर गए पैबंद टाट में ,
    दुरस्त कर ना पाया इन्हें उलझे तार से ।
    बहुत मर्मस्पर्शी सृजन ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  4. रिहाई ना थी टूटी रिश्तों जंजीरों बाँध से l
    जकड़ रखी थी कुछ बंदिशों ने मनोभाव से ll

    रफ़ू हो हो वो बिखर गए पैबंद टाट में l
    दुरस्त कर ना पाया इन्हें उलझे तार से ll

    वाह !! बहुत खूब...लाजबाब...एक बार जो टूटे रिश्ते कहाँ जुड़ पाते है रफू करने पर भी निशान छोड़ जाते हैं...सादर नमन आपको

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    1. आदरणीया कामिनी दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ जून २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. आदरणीया दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए शुक्रिया
      सादर

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  6. वाह बहुत सुंदर।
    गहन भाव लिए मर्मस्पर्शी सृजन।

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    1. आदरणीया कुसुम दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  7. वाह! बहुत सुंदर!!!

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    1. आदरणीय विश्वमोहन जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  8. रिश्तों की रफुगिरी एकतरफा होनी मुश्किल होती है ।
    भावप्रवण रचना ।

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    1. आदरणीया संगीता दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  9. "चुभ रही एक कसक ज़िस्म कोने में l
    छलनी हो रही अंगुलियाँ इन्हें सिने में ll" -
    हर पंक्तियाँ चुभती-सी लगे है पढ़ने में ...:)

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    1. आदरणीय सुबोध जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  10. वाह बहुत सुंदर सृजन ।

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    1. आदरणीय हष॔ जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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  11. रफ़ू कर फ़िर सी लूँ उन रिश्तों को l
    तार तार कर गयी वो जिन रिश्तों को ll

    चुभ रही एक कसक ज़िस्म कोने में l
    छलनी हो रही अंगुलियाँ इन्हें सिने में ll

    बहुत सुन्दर.. रिश्ता दो लोगों के प्रयास से ही जिंदा रहता है.. वरना उंगलियाँ छलनी हो ही जाती हैं...

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    1. आदरणीय विकास जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए दिल से शुक्रिया
      सादर

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