Tuesday, June 7, 2022

रंजिश

सदियों बाद भी रंजिशें कम ना थी इश्क खुमारी बीच l
दरिया तेजाब का बहता रहा हर दफा शुष्क आँखों बीच ll

उलझता रहा अपने ही इश्क के रंगीन हसीन ख्यालों बीच l
मोहलत कभी माँग लाता साँसों की अधजली फ़िज़ाओं बीच ll

कहानियाँ इस दहलीज की लफ्जों में मुकम्मल थी नहीं l
दस्तूर इस अंजुमन की रातें बिन चाँद गवाह अधूरी थी ll

ख्वाइशों की गुजारिशों में तल्ख़ थी बंदिश रिवाज़ों की l
लकीरों के कोहराम में हथेली सूनी थी मेहँदी हाथों की ll

कोई सरहद ना थी इन भींगे भींगे मौन अल्फ़ाज़ों बीच l
पहचान खुद की गुमनाम थी आइनों के इन अक्सों बीच ll

पहचान खुद की गुमनाम थी आइनों के इन अक्सों बीच l
पहचान खुद की गुमनाम थी आइनों के इन अक्सों बीच ll

16 comments:

  1. बेहतरीन ..... लेकिन ये ग़ज़ल न हुई ।।

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    1. आदरणीया संगीता दीदी जी
      आपका मार्गदर्शन इसी तरह मिलता रहे ताकि खामियां और त्रुटियों की गुंजाइश ना के बराबर रहे l आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार l

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  2. गज़ल नुमा कविता,कविता नुमा गज़ल

    अच्छी और सुंदर रचना
    वाह

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    1. आदरणीय भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  3. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कृति ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 8 जून 2022 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
    >>>>>>><<<<<<<
    पुन: भेंट होगी...

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    1. आदरणीया दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए तहे दिल से आपका आभार

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  5. बहुत सुन्दर सृजन

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    1. आदरणीया दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  6. Replies
    1. आदरणीय
      गुणीजन शुक्रिया

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  7. सुंदर सराहनीय रचना ।

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    1. आदरणीया जिज्ञासा दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  8. वाह!गज़ब लिखा अनुज।
    सादर

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    1. आदरणीया अनीता दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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