Friday, July 7, 2023

शिकवा

अदना सा ख्याल यूँ ही जाने क्यों मन को भा गया l

गुफ़्तगू इश्क की खुद से भी कर लिया करूँ कभी ll


गुजरु जब फिर यादों की उन तंग गलियों से कभी l

जी लूँ हर वो लम्हा उम्र जहां आ ठहरी थी कभी ll


हँसूँ खुल कर मिल कर खुद से इसके बाद जब कभी l

झुर्रियों चेहरे की सफ़ेदी बालों की इतराने लगे खुशी ll


अन्तर फर्क़ करूँ उन लिफाफों में कैसे फिर कभी l

सूखे गुलाब आज भी जब महक रहे ताजे से वहीं ll


संवारू निहारूं जब जब दर्पण फुर्सत लम्हों में कभी l

परछाईं झलक इश्क की भी शिकवा और ना करे कभी ll

10 comments:

  1. अच्छे भाव हैं, वाह!

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    1. आदरणीय भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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    1. आदरणीय भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  3. अति उत्तम भावनाओं को व्यक्त करती अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      आपका उत्साहवर्धन ही मेरी कूची के रंगों की सुनहरी धुप की मीठी बारिश हैं, आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

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  4. सुंदर प्रस्तुति

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    1. आदरणीय ओंकार भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  5. अच्छी भावाभिव्यक्ति !

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  6. आदरणीय भाई साब
    सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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