Saturday, July 6, 2024

स्वच्छंद पहेली

साये ने मेरे प्रतिलिपि लिखी थी एक गुमनामी शाम की l

गुलमोहर छाँव परछाई सहमी थी उस किनारे घाट की ll


कशिश सरोबार सिंदूरी श्रृंगार मन वैजयंती ताल की l

सहज लहर पदचापें ठौर उस क्षितिज गुलाबी साँझ की ll


साँझी लेखनी साँसे कोई प्रत्युत्तर अंकित इस राज की   l

बहक उलझ गयी थी केशें उस हसीं चित्रण ख्वाब की ll


अंतरंगी डोर वैतरणी रूपरेखा उस खोई पहेली शाम की l

सतरंगी साजों धुन पिरो रही छलकती ओस बूँदों ख़ास की ll


मंथन उस काव्य धरा सजली थी प्रतिलिपि मेरे नाम की l

स्वच्छंद मुक्त हो गयी पिंजर बंद धड़कने मेरे उस चाँद की l

7 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 07 जुलाई 2024 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  2. वाह! क्या बात 👌

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