Wednesday, February 4, 2026

पीताम्बरी

गोधूलि साँझ रिमझिम ओस लटों सेज क्षितिज धरा बेलों लाली से l
मिट्टी धागों कायनात निखर आयी थी बुनकर चरखे सायों स्याही से ll


कोरे सादे कागज मिथ्या सत्य सी खोई थी परछाई कपोल नजारों से l
इशारों महकी उल्फतों ने लिख डाली सौगात आयतें महताब लाली से ll


झूम उठीं कठपुतली पीताम्बरी रिमझिम रंगीन बदरी बरसातों से l
फिसलती अंगुलिया अंगड़ाई काश्तकारी ने पायदान रंगी रूहानी से ll


जुस्तजू रूह बँधी थी जिन पतंगे पेंच गजलों बाज निगाह कहानी बंदगी से l
जिक्र उस आरज़ू सहर बदनाम हो गयी दीवारों की कानाफूसी गुफ़्तगू से ll


मेघों हिलोरी आतिशबाजी से कूची रंग भर गयी आसमाँ कला बाजी से l
इन कड़ियां अठखेलियों से कहानी एक नयी पपोल आयी पीपल पीछे से ll

Saturday, January 17, 2026

ll धैर्य ll

हौसला रख संघर्ष कर हर कदम अपने आप से l
थकना नहीं रुकना नहीं हार कभी नियति सामने ll


कर नजरअंदाज अपूर्णता थाम निपुणता कला हाथ में l
लक्ष्य मंजिल दूर हो के भी दूर नहीं रख ज़ज्बा साथ में ll


बदल लकीरें हाथों की रेखाएं मस्तिष्क ललाट की l
विधि विधमान विराजेगी बदल तकदीर ज्वार में lI


अर्पण होगा जीवन जब सीखने खुद की खामियों पास में l
लक्ष्य हिमालय बेंध जायेगा अर्जुन सरीखे प्रतिबिंब छांव से lI


अमूल्य हैं समय कोई दूजा तेरी साँसों वरदान सा तुल्य नहीं l
अंधेरे कभी डरना नहीं मिलेगी विजय विचलित तू कभी होना नहीं ll


विचलित तू कभी होना नहीं, विचलित तू कभी होना नहीं ll

Sunday, January 4, 2026

महासमर

तहजीब बाजीयाँ मोगरा गुलाब कांटों खुशबुदारी की l

कायनात सहर भीगें नयनों अक्स ओस पहरेदारी की ll

 

स्वरांजलि दीप ध्वनि हिम पटल शिखर लहर मझधारों की l

गाथा चिंतन कहानी नयी बादलों के स्वरूप संसारों की ll

 

अंतरंगी धागे प्रचंड अलाव तपिश सुनहरी धूपों की I

क्षितिज मेरुदंड गुँथ रही इन्द्रधनुषी वैतरणी अनुरागों की ll

 

लिपिबद्ध हो केशवों झांझर मेहंदी पंखुड़ि हाथों की l

कह रही नयी चेतना काफिर आवारा हवाओं की ll

 

ख्यालातों के खाली ज़िल्द पर पानी स्याही अल्फाजों की l

लिख गयी नाजुक गठबंधन महासमर प्रयासों की ll