Tuesday, March 10, 2026

नीलामी

कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l

मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया ll


बेख्याली काफिर नींदों दुनिया को ख्वाबों खिलोनों रूप दे आया l

शून्य मझधार कठपुतली स्वाँग रचा दर्पण प्रतिबिंब रूप दे आया ll


खुशबु चंदन सजा भस्म चिताओं सौदा आकंठ लालच से कर आया l

हुनर जौहरीयों को टूटे आईने स्वप्निल चमकता इश्तहार बेच आया ll


अनुबंध टूटा जो साँसों से बंजारी धड़कनों को दफन कर आया l

ख्यालों अह्सास परे जिंदा मुर्दों को मुर्दों का श्मशान बेच आया ll


हर पायदान कहानी नई बुन ठगों बीच सूनी सी पदचाप छाप छोड़ आया l

आहट द्वारे मोक्ष कांपते हाथों रूहों तिलांजलि दे अशर्फीयाँ खरीद लाया ll