कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l
मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया ll
बेख्याली काफिर नींदों दुनिया को ख्वाबों खिलोनों रूप दे आया l
शून्य मझधार कठपुतली स्वाँग रचा दर्पण प्रतिबिंब रूप दे आया ll
खुशबु चंदन सजा भस्म चिताओं सौदा आकंठ लालच से कर आया l
हुनर जौहरीयों को टूटे आईने स्वप्निल चमकता इश्तहार बेच आया ll
अनुबंध टूटा जो साँसों से बंजारी धड़कनों को दफन कर आया l
ख्यालों अह्सास परे जिंदा मुर्दों को मुर्दों का श्मशान बेच आया ll
हर पायदान कहानी नई बुन ठगों बीच सूनी सी पदचाप छाप छोड़ आया l
आहट द्वारे मोक्ष कांपते हाथों रूहों तिलांजलि दे अशर्फीयाँ खरीद लाया ll
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