Wednesday, August 18, 2010

खुशनसीब

मंजिल नहीं अब कोई

जिन्दगी सिमट गई बाहों में तेरी

मिल गया जो प्यार तेरा

यूँ लगा मिल गया सारा जहाँ

दिया तुने इतना यार

लुटा दिया सारा प्यार

काबिल मैं ना था

पर बना दिया तुमने

सबसे खुशनसीब इंसान

Friday, August 13, 2010

अंतर्ध्यान

शब्द जो आये अभी ध्यान

दूसरे पल ही हो जाये अंतर्ध्यान

कर लिया अगर कलम बंद

तो रह जाये याद

वरना फिर तो मुश्किल

करना उसे पुन्ह याद

ह़र पल बदलते भावों में

संभव नहीं मिले उसी का ध्यान

शब्द जो हो गया अंतर्ध्यान

अजब

लड्क्पन से जवानी तक मचलता रहा दिल

पर मिला ना ऐसा कोई

संग जिसके मिले खुशियाँ ढेर सारी

कितनी अजब ये कहानी

जिसमे कभी ना जिन्दगी झांकी

साँसे

तन्हा तन्हा रातें बदलती साँसे

महफूज प्यार की किरणों से

उम्मीद की साँसे

ख़त्म तन्हाई की वो रातें

मिले साँसों से साँसे

एक पल

सोचा था मिलेगे कभी तो

बिछड़े दो दिल कहीं तो

पर हुआ ना ऐसा अभी तक

लटक गयी जिन्दगी कब्र पर

बची है जो साँसे अभी तक

खुदा करे आके मिलो तुम एक पल

हसरतें इन चन्द घड़ियों में हो जाये पूरी

मिल जाये एक नयी जिन्दगी हमें भी