Saturday, September 12, 2026

बिडम्बना

टीलों घुमावदार रेत धोरों जलते नंगे पैर अंगारों मरहम को I

काँटे बबूल सेज लहू गागर चुभती जख्म घाव टिसन को ll

 

बिडम्बना मेहंदी पैरों उपजी विपश्यना झाँझर लाली को l

मृगतृष्णा बेड़ियाँ करताल बिन पानी बरसते बादल को ll

 

बदरंग ना हो फटा आँचल अनचाहे तेजाब खारे पानी को l

अस्तित्व उलझी उलझी मौन घूंघट ओढ़नी नीम झाड़ी को ll

 

पलकों टपकती नूर माँगी दुआएँ सोई आँसुयें बरसातों को l

विरासत लिखी सूखे पानी तरसते कंठ मरुधर आँगन को ll

 

बिलखती व्याकुल पिपासा सूखे आँसू कांटों लिपट रोने को l

मुरझाई कपोलें खोई मरूधरा शीतल रातें मझधार साये को ll


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