पा लिया जिसने ढाई आखर का ज्ञान
कर लिया उसने अमृत्व रस पान
बहे माधुर्य कंठ से
प्रेम सुधा बन वरदान
प्यार और बोलों के आलिंगन से
खुल जाये दिल के द्वार
बजे कर्णों में एक ही धुन बारम्बार
जान लिया जिसने ढाई आखर का आधार
ही गया उसका मुरीद सारा संसार
Thursday, December 1, 2011
अकेला चाँद
लाखों तारों में चाँद अकेला
चांदनी की उसकी आगे
शर्माए तारों का मेला
जगमग करते तारों के बीच
चमके जैसे माथे की बिंदिया
बदले रूप देख तारों की बेला
नज़र ना लगे किसीकी
लगा लिया काजल का टीका
चाँद अकेला पर बात निराली
इसके आगे तारों की टोली हारी
फिर भी लाखों तारों में चाँद अकेला
चांदनी की उसकी आगे
शर्माए तारों का मेला
जगमग करते तारों के बीच
चमके जैसे माथे की बिंदिया
बदले रूप देख तारों की बेला
नज़र ना लगे किसीकी
लगा लिया काजल का टीका
चाँद अकेला पर बात निराली
इसके आगे तारों की टोली हारी
फिर भी लाखों तारों में चाँद अकेला
किस राह
किस राह चलना है
मुझको बतलाना तुम
सबक अच्छा मिले
उस राह का पता बतलाना तुम
पर बीच राह हाथ छुड़ा कर जाना न तुम
किस राह चलना है
मुझको बतलाना तुम
मुझको बतलाना तुम
सबक अच्छा मिले
उस राह का पता बतलाना तुम
पर बीच राह हाथ छुड़ा कर जाना न तुम
किस राह चलना है
मुझको बतलाना तुम
नयनों की भाषा
सदियाँ लग गयी जीन लफ्जों को कहने में
आँखों ने पल वो कह डाली
छुआ जब दिल को प्यार ने
अश्रु धरा बह आयी
इन्तजार खत्म हुआ
नयनों को नयनों की भाषा समझ आयी
आँखों ने पल वो कह डाली
छुआ जब दिल को प्यार ने
अश्रु धरा बह आयी
इन्तजार खत्म हुआ
नयनों को नयनों की भाषा समझ आयी
दूजी बेला
प्यार जो पनपा
शादी के बंधन में महका
सुन्दर फूल खिले दो ऐसे
प्यार का आंगना खुशियों से छलका
उड़ गया वक़्त पंख लगा के
आ गयी स्वर्ण बेला
वर्ण किया फिर एक दूजे को
शुरू हो गयी प्यार की दूजी बेला
शादी के बंधन में महका
सुन्दर फूल खिले दो ऐसे
प्यार का आंगना खुशियों से छलका
उड़ गया वक़्त पंख लगा के
आ गयी स्वर्ण बेला
वर्ण किया फिर एक दूजे को
शुरू हो गयी प्यार की दूजी बेला
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