तज़ुर्बा ना पूछ ए सोखियाँ l
झुरिआ वयां रही ख्यालों की लड़ियाँ ll
बदल गयी जो रंग जुल्फ़ों के l
वो चाँदनी कम ना थी औरों से ll
लिखें हैं उन्हें खत लाखों हटेलिओं में l
मुरीद थी निगाहें जिनकी परवाज़ों में ll
सुरूर उस साकी का औरों से दूजा था l
हिना सी महकती गुलबदन का आसमां और था ll
कभी पर्दा कभी बेपर्दा अटखेलियाँ करती बेपरवाह l
जादू सा सम्मोहन वश करती उसकी नादानियाँ ll
फ़िसल गए वो वक़्त दरख़्तों की गहराई में l
खुमारी फिर भी उतर ना पायी दिल की गहराई से ll
जिन्दा वो आज भी हैं साँसों की सच्चाई में l
बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में ll
बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में l
बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में ll