Monday, December 7, 2020

तज़ुर्बा

तज़ुर्बा ना पूछ ए सोखियाँ l
झुरिआ वयां रही ख्यालों की लड़ियाँ ll

बदल गयी जो रंग जुल्फ़ों के l
वो चाँदनी कम ना थी औरों से ll

लिखें हैं उन्हें खत लाखों हटेलिओं में l
मुरीद थी निगाहें जिनकी परवाज़ों में ll

सुरूर उस साकी का औरों से दूजा था l
हिना सी महकती गुलबदन का आसमां और था ll

कभी पर्दा कभी बेपर्दा अटखेलियाँ करती बेपरवाह l
जादू सा सम्मोहन वश करती उसकी नादानियाँ ll

फ़िसल गए वो वक़्त दरख़्तों की गहराई में l
खुमारी फिर भी उतर ना पायी दिल की गहराई से ll

जिन्दा वो आज भी हैं साँसों की सच्चाई में l
बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में ll

बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में l
बेताबी वही हैं धड़कनों की परछाई में ll

Saturday, December 5, 2020

फ़िदा

तू इस शहर की सहर थी I
मैं उस शहर की शाम II

देखा तुझे यूँ अचानक जब अपने दालान I
यूँ लगा जैसे जेहन उतर आया कोई चाँद II

पूछ रहे तुम मुझ से मेरा ही पता I
दिल को भा गया मुसाफ़िर तेरा यह अंदाज़ II

पैगाम लबों पे उनके अब तलक ऐसे ख़ामोश था I
किसी खाब्ब को जैसे किसी चाँदनी रात का इंतज़ार था II

भूल गया पता अपना एक पल को I
ग़ुम हो गया इशारों की परछाई को II

कुछ पल वो ठहरे कुछ कहते कहते अटके I
फिर थमा दामन हाथों में हौले से चल दिए II

बेजान सा खड़ा मैं कुछ समझ ना पाया I
वो जोड़ गयी दिलों के तार कैसे समझ ना पाया II

बस उसकी मुस्कराहट पर फ़िदा हो आया II
बस उसकी मुस्कराहट पर फ़िदा हो आया II

खैरियत

अहसास बस खाली खाली हैं I

तेरे यूँ रुसवा हो चले जाने के बाद II


सहमी सहमी सी मंज़िल हैं I

रुकी रुकी सी जिंदगानी हैं II


आँखों में कुछ नमी नमी सी हैं I

पानी कम दरिया लहू भारी हैं II


दिल रुला के गए तुम ऐसे I

अलविदा दुनिया सारी हैं II


वीरानी दहलीज बदल गयी दिलों के मौसम I

खंडहर तब्दील कर गयी यह दिल बेमौसम II


बची साँसों के पड़ाव आखरी हैं I

ख्वाईश बची हैं बस एक आखरी II


बस पूछ लेना खैरियत तुम मेरी I

गूजरों जब तुम कभी मेरी गली II  

Monday, November 16, 2020

लम्हें

लम्हें कुछ खुद से चुरा लाया l
कुछ ख़ुदा से उधार ले आया ll

तुम मिलोगे लम्हों के जिस पल को l 
उस पल को जिंदगी की सौग़ात दे आया ll 

बेचैन हो रही उम्रदराज लम्हें l
निशा ठिठोली कर रही अधेड़ लम्हें ll 

कसूर चमकती राहों में ठहरे पलकों का था वैसे l  
लुभा आँख मिचौली खेल रही पलकों का था जैसे ll 

नज़र अंदाज़ ना कर पाया उन बीते लम्हों को वैसे l
सुलगा रही चिंगारी अरमानों में नये लम्हों को जैसे ll 

करवटें गुमशुम हो गयी इन लम्हों के झरोखों में जैसे l
सूनी थी सेज़ बिन प्रितम खोये खोये इन लम्हों में जैसे ll 

कर रहा हूँ बेक़रारी से इंतज़ार आनेवालें उन लम्हों का वैसे l 
मिलोगे जब तुम अलविदा कह एकांकी गुजरे लम्हों को जैसे ll 

मिलोगे जब तुम अलविदा कह एकांकी गुजरे लम्हों को जैसे l
मिलोगे जब तुम अलविदा कह एकांकी गुजरे लम्हों को जैसे ll 

Thursday, November 12, 2020

रंग

आयतें बन बरस रही लबों पे तू अल्फ़ाज़ों की तरह l
मिल गयी रुमानियत काफिर को रिवायतों की तरह ll

ज़िक्र तेरा रहा हर इबादत में रूह की तरह l
गूँज रहा कलमा तेरा नूर ए अज़ान की तरह ll

रूहानियत बन बरस रही तू सपनों की ताबीर की तरह l
छू गयी दिल ए कायनात को तू खुदा की तरह ll

रंग समेटे हैं तूने लाखों इंद्रधनुष की तरह l
समेट ले मुझको भी तेरी आगोश में समंदर की तरह ll

रंज हैं उस चाँद से छिपा हैं अब तलक गैरों की तरह l
प्रतिलिपि जिसकी बसी दिल में धड़कनों की तरह ll

प्रतिबिंब छाया तेरी नाच रही बाँसुरी सरगम की तरह l
छा रही ख़ुमारी तेरे इश्क़ की पतझड़ में सावन की तरह ll

उतर आ धरा बन मरुधर मृगतृष्णा की तरह l
मिल जाऊ रच जाऊ तुझ में जीवन तरंगों की तरह ll

मिल जाऊ रच जाऊ तुझ में जीवन तरंगों की तरह l
मिल जाऊ रच जाऊ तुझ में जीवन तरंगों की तरह ll