Wednesday, December 23, 2009

प्रभात

कर रहा हु इन्तजार

ढल रहा है दिन हो रही है शाम

होगा भाग्य उदय कल तो

कह रहा है मन ये बार बार

किया नहीं जब कोई अनुचित काम

निश्चय ही रब देगा मेरा साथ

निराश अभी हुआ नहीं

फैलाये बाहे कर रहा हु

एक नए प्रभात का इन्तजार

लड़क्प्पन की कहानी

चलती है जब बात पुरानी

याद आ जाती है लड़क्प्पन की कहानी

चंदा की वो कहानी जिसे सुनाती थी माँ

माँ के ममता में लिपटी वो लोरी की रागिनी

सुनके जिसे सो जाते थे माँ के आँचल में

अब ना कभी लोटेगी वो जिंदगानी

जब भी चले कोई बात पुरानी

याद आ जाती है लड़क्प्पन की कहानी

आत्मा

कहा दु:खी आत्मा ने भटकती आत्मा से

क्यो न हम तुम मिल जाए

कुछ तो दुनिया का भला कर जाए

अकेले अकेले सताने से अच्छा

दोनों मिल दुनिया को सताए

मज़ा आयेगा खूब

सिसकिया भरती आत्माओ

से जब होगी मुलाकात

चिंतामणि

है प्यारे बड़े ही चिंतामणि

चिंता से ये कभी मुक्त होते नहीं

नाम पड़ा इसीलिए चिंतामणि

ख़ुद की चिंता इनको सताती नहीं

देख दूसरों की खुशिया

मारे चिंता नींद इनको आती नहीं

ऐसे है अपने प्यारे श्रीमान चिंतामणि

Friday, December 18, 2009

माया

माया के मायाजाल में फंसा जो

मायाजाल के महापोश से बच न सका वो

लालसा खत्म होती नहीं

लालच कभी मरता नहीं

दलदल माया का ऐसा

इससे कोई निकल पाता नहीं

चक्रव्यू ऐसा बाहर का मार्ग नजर आता नहीं

माया से मुक्ति इतनी आसान नहीं

माया के बिना रह पाना भी आसान नहीं