कर रहा हु इन्तजार
ढल रहा है दिन हो रही है शाम
होगा भाग्य उदय कल तो
कह रहा है मन ये बार बार
किया नहीं जब कोई अनुचित काम
निश्चय ही रब देगा मेरा साथ
निराश अभी हुआ नहीं
फैलाये बाहे कर रहा हु
एक नए प्रभात का इन्तजार
कर रहा हु इन्तजार
ढल रहा है दिन हो रही है शाम
होगा भाग्य उदय कल तो
कह रहा है मन ये बार बार
किया नहीं जब कोई अनुचित काम
निश्चय ही रब देगा मेरा साथ
निराश अभी हुआ नहीं
फैलाये बाहे कर रहा हु
एक नए प्रभात का इन्तजार
है प्यारे बड़े ही चिंतामणि
चिंता से ये कभी मुक्त होते नहीं
नाम पड़ा इसीलिए चिंतामणि
ख़ुद की चिंता इनको सताती नहीं
देख दूसरों की खुशिया
मारे चिंता नींद इनको आती नहीं
ऐसे है अपने प्यारे श्रीमान चिंतामणि
माया के मायाजाल में फंसा जो
मायाजाल के महापोश से बच न सका वो
लालसा खत्म होती नहीं
लालच कभी मरता नहीं
दलदल माया का ऐसा
इससे कोई निकल पाता नहीं
चक्रव्यू ऐसा बाहर का मार्ग नजर आता नहीं
माया से मुक्ति इतनी आसान नहीं
माया के बिना रह पाना भी आसान नहीं