ह़र कदम जो उठ रहा है
एक नयी मंजिल की ओर बड़ रहा है
दिशाएं अब अनजानी नहीं
ह़र कदम कारवां नया बन रहा है
ह़र कदम जो उठ रहा है
एक नयी मंजिल की ओर बड़ रहा है
दिशाएं अब अनजानी नहीं
ह़र कदम कारवां नया बन रहा है
मेरे दर्द से तुने अगर नाता जोड़ा होता
खुदा तुने इंसा बनाया ना होता
पर तुने तो इंसा बनाये दर्द सहने को
इसीलिए मुझसे नाता कैसे जोड़ा होता
जिन्दगी ने ह़र निराश कर दिया
जब जरुरत पड़ी
तब अपनों ने भी दरकिनार कर लिया
जिस जैसे अच्छा लगा
उसने वैसा व्यवहार किया
किसीने जिन्दगी का चीरहरण किया
किसीने आबरू का वस्त्रहरण किया
जिन्दगी ने ह़र पल सिर्फ निराश किया
ज़िक्र जो तेरा चला
वक़्त कुछ पल को
थम सा गया जैसे
शांत धड़कने तेरे हुस्न के चर्चे
चुपचाप सुनती रही
मन ही मन तेरी तस्वीर बनाती रही
तेरे इश्क में जाने कैसे कैसे स्वांग रचाए
तरह तरह के रंग लगाए
तेरी आरजू को फिर भी
मुखोटे में छुपा ना पाये
नकाब सारे नाकाम हो गए
अफ़साने मोहब्बत सरेआम हो गए