Friday, March 23, 2018

कब्रगाह

वो दूर क्या गये एक भूल से

दिल यादों का कब्रगाह बन गया

फ़नाह थी जो मोहब्बत कभी

लिपटी रहती थी फूलों की चादर सी

जो कभी इस मज़ार से

मुरझा रुखसत हो गयी

अलविदा कह

तन्हा बैचेन छोड़ गयी इस रूह को

भटकने यादों के कब्रिस्तान में

भटकने यादों के कब्रिस्तान में

Thursday, March 8, 2018

हसीं

उनकी एक हसीं से रंगों के गुलाल खिल गये

अधरों पर मानों गीत मधुर सज गये

चेहरे से नक़ाब जो सरक गया

तमस को चीर आफ़ताब खिल गये

बरसते लावण्य में भींगे सौंदर्य से

जैसे रूप अप्सरा यौवन खिल गये

देख मदहोशी की इस मधुशाला को

फिजाँ भी नशे में बल खाकर बहकने लगे

मानो वक़्त से पहले ही

चमन में सावन झूमने लगे

चमन में सावन झूमने लगे

Thursday, February 22, 2018

महफ़िल

दिल कह रहा हैं

आज फिर एक बार

महफ़िल तेरी यादों के रंगों से सजा दूँ

टूटे दिल को फ़िर से

प्यार के रंगों से सजा दूँ

हमसफ़र बस  इतना तू जान ले

मगरूर ना थी आशिक़ी हमारी

पर देख ख़फ़ा नज़रें तुम्हारी

तन्हा रह गयी दीवानगी हमारी

तू मेरी छाया मैं तेरा दर्पण

तू मेरी साज़ मैं तेरा सरगम

दिल कह रहा हैं

एक बार फ़िर  से

महफ़िल में गीत यह गुनगुना दूँ

और तेरी हसीं के रंगों से

आज एक बार फ़िर महफ़िल सजा दूँ

एक बार फ़िर महफ़िल सजा दूँ 

Thursday, February 15, 2018

इबादत

बदरंग थी इबादत हमारी

लहू का रंग जो उसे मिला

निखर बन गयी क़यामत भारी

मंत्र मुग्ध हो

झुक गयी कायनत भी सारी

हृदय स्पर्शी मर्माहत ढाल ऐसी बन गयी

ढल नये आयाम में

जैसे सुन्दर आयतें गढ़ गयी

मानों लहू से लिखे कलमें से  

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी


Wednesday, February 14, 2018

यारी हमारी

कोशिशें बहुत की

मुड़ कर जाते कदमों को रोक लूँ

पर कह न पाया दिल की जो बात

रुख उनकी हवाओं का कैसे मोड़ दूँ

लफ्ज़ जाने आज क्यों इतने पराये हो गए

लबों पे आते आते बेगाने हो गए

पलट गयी थी अब दिल की हर बाज़ी

कर रुखसत चुपके से यारी हमारी

यारी हमारी