Thursday, February 15, 2018

इबादत

बदरंग थी इबादत हमारी

लहू का रंग जो उसे मिला

निखर बन गयी क़यामत भारी

मंत्र मुग्ध हो

झुक गयी कायनत भी सारी

हृदय स्पर्शी मर्माहत ढाल ऐसी बन गयी

ढल नये आयाम में

जैसे सुन्दर आयतें गढ़ गयी

मानों लहू से लिखे कलमें से  

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी

इबादत हमारी भी कबूल हो गयी


Wednesday, February 14, 2018

यारी हमारी

कोशिशें बहुत की

मुड़ कर जाते कदमों को रोक लूँ

पर कह न पाया दिल की जो बात

रुख उनकी हवाओं का कैसे मोड़ दूँ

लफ्ज़ जाने आज क्यों इतने पराये हो गए

लबों पे आते आते बेगाने हो गए

पलट गयी थी अब दिल की हर बाज़ी

कर रुखसत चुपके से यारी हमारी

यारी हमारी

Thursday, February 1, 2018

मौका

मशग़ूल रहा मैं जिंदगी की दौड़ भाग में

गुफ्तगूँ कभी कर ना पाया अपने आप से

वक़्त मेरे लिए ठहर पाया नहीं

गुजर गयी जिंदगी जैसे घुँघरू की ताल पर

सोचा कभी साक्षातार करलूँ जीवन आत्मसात से

थिरकने फिर इसकी धुन पर

चल पड़ा मैं

कभी मधुशाला की चाल पर

कभी मंदिर मस्जिद की ताल पर

रूबरू फिर भी हो ना पाया अपने आप से

मंजर इसका बयाँ कैसे करुँ समझ ये कभी पाया नहीं

नापाक खुदगर्जी सी लगने लगी

बटोरी थी अब तलक जो शौहरतें

कसक बस एक इतनी सी रह गयी

मिलने खुद से

ललक अधूरी यूँ रह सी गयी

निर्वृत हो जाऊँ अब मोह माया जाल से

गले लिपट रो सकूँ अंत में अपने आप से

कशिश कही यह अधूरी रह ना जाए

इसलिए जिंदगी बस एक मौका ओर दे दे

ताकि सकून से

गुफ्तगूँ कर पाऊँ अपने आप से

अपने आप से

Saturday, January 20, 2018

भाग्य का उदयमान

आप की तरह नहीं मेरी लेखनी में वो धार

पर संगत में आपकी उसको भी मिलेगा निख़ार

दम दिखलायेगी यह भी फिर अपना

जब संग इसके होगा आपका साथ

ओत प्रोत हो नई प्रेरणा से

यह भी फिर कभी रचेंगी अपना इतिहास

ताल मेल का सामंजस्य जो बैठ गया

बन जायेगा यह भी फिर वरदान

स्वतः ही लेखनी को फिर मिल जायेगा

एक नई ऊर्जा का संचार

फ़िर मेरी भी हर एक रचना से होगा

मेरे एक नए भाग्य का उदयमान





Friday, January 12, 2018

अल्फाजों की दुनिया

बड़ी जादुई हैं अल्फाजों की दुनिया

दर्द अगर मिल जाये तो

बिखर जाती हैं रुमानियत की दुनिया

बिखर जाती हैं रुमानियत की दुनिया

कभी गीत तो कभी ग़ज़ल बन

अफसानों में निखर आती हैं दुनिया

अफसानों में निखर आती हैं दुनिया

खामोश लफ्जों से जब बयां होती हैं

सज जाती हैं फिर अल्फाजों की एक नयी दुनिया

सज जाती हैं फिर अल्फाजों की एक नयी दुनिया

अश्क़ भी रो पड़ते हैं

अश्क़ भी रो पड़ते हैं

देख इनकी तन्हा भरी दुनिया

दफ़न हैं कहीं दिल की गहराईओं में

समटे अनगिनत राज अल्फाजों की दुनिया

समटे अनगिनत राज अल्फाजों की दुनिया

क्योंकि

बड़ी जादुई हैं अल्फाजों की दुनिया

बड़ी जादुई हैं अल्फाजों की दुनिया

Tuesday, January 2, 2018

गुंजयमान

अक्षरों से आसमाँ रंग दूँ

शब्दों को गुंजयमान कर दूँ

प्रेरणा ऐसी बन जाऊ मैं

हर काव्य सुधा का

अमृत रस पान बन जाऊ मैं

अभिभूत कर क़ायनात को

अपनी रचना को सार्थक कर जाऊ मैं

आफ़ताब भी धरा पर उतर पड़े

स्वर लहरों पर विराजमान हो

अक्षरों के मोतियों को

पिरों शब्दों में

संगीतमय कर जाऊ जब मैं

संगीतमय कर जाऊ जब मैं

Tuesday, December 26, 2017

इत्र सी हसरतें

हसरतें कुछ ऐसी पाल ली मैंने

अंगारों से जैसे दोस्ती करली मैंने

दहकते शोलों की चिंगारियां

लपटों की ज्वाला बन भभक आयी जैसे  

अब ओ आसमां मंज़िल ना थी मेरी जैसे

भरने अधूरेपन को

लगन की कवायद संग थी जैसे मेरे

आतुर थी लालसायें मेरी

छूने विषमताओं की जिज्ञासायें मेरी

बदल गयी थी दुनिया मेरी सारी

फिजाओं की बयार में घुल रही थी

इत्र सी हसरतें जैसे मेरी सारी 

इत्र सी हसरतें जैसे मेरी सारी