Wednesday, May 26, 2021

क़त्ल

दुरस्त गुजर रही थी जिंदगी अकेले में l
क़त्ल कर दिया हसीन खाब्बों के मेलों ने ll

गुनाह हो गया बेबाक़ी निगाहों से l
रिहा कैसे हो उन उम्र कैद बंदिशों से ll

चाँद नज़र आया एक शाम मेरे आँगन में l
चल पड़ा वो भी दिल कारवें संग राहों में ll

मुक़ाम वो आ गया चौराहा ओर करीब आ गया l 
सिर्फ अर्ध चाँद का साया रह गया इस मंज़िल पास ll

आहटों से रसिक इस कदर रहा बेख़बर l
आसमां डूबा ले गया चाँद घटाओं के पास ll

बिसर गया पथिक निकला था किस सफर l
कर बैठे गुनाह उसके मासूम से हमकदम ll  

क़त्ल हो गया अरमानों के तसब्बुर का l
गुनहगार बन गया टूटे दिल ख्यालों का ll  

28 comments:

  1. आहटों से रसिक इस कदर रहा बेख़बर l
    आसमां डूबा ले गया चाँद घटाओं के पास ll

    बिसर गया पथिक निकला था किस सफर l
    कर बैठे गुनाह उसके मासूम से हमकदम ll बहुत खूब...।

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    1. आदरणीय संदीप जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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    1. आदरणीय शिवम् जी
      बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27-05-2021को चर्चा – 4,078 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

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    1. आदरणीय दिलबाग जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान कर इससे जनमानस तक पहुँचाने के लिए शुक्रिया .....मैं भी अवश्य पधारूँगा
      सादर
      मनोज क्याल

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    1. आदरणीय रोहीतास जी
      बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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  5. लाजवाब अभिव्यक्ति ।

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    1. आदरणीया जिज्ञासा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  6. बेहतरीन रचना

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    1. आदरणीया सरिता दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  7. चाँद नज़र आया एक शाम मेरे आँगन में l
    चल पड़ा वो भी दिल कारवें संग राहों में ll
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर।

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    1. आदरणीया सुधा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  8. 👌👌वाह! बहुत ही बेहतरीन 👌👌👌

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    1. आदरणीया मनीषा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  9. क़त्ल हो गया अरमानों के तसब्बुर का l
    गुनहगार बन गया टूटे दिल ख्यालों का ll


    सुन्दर...

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    1. आदरणीय विकास जी
      बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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  10. चाँद नज़र आया एक शाम मेरे आँगन में l
    चल पड़ा वो भी दिल कारवें संग राहों में ll

    बहुत खूब !!एक से बढ़कर एक शेर,लाज़बाब....

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    1. आदरणीया कामिनी दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  11. वाह! बहुत खूब।
    उम्दा शेर ।

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    1. आदरणीया दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  12. अति सुन्दर ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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  13. बहुत खूब ...
    हर शेर बेमिसाल, अलग अंदाज़ का ... लाजवाब ....

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    1. आदरणीय दिगम्बर जी
      आपका बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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    1. आदरणीया दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर
      मनोज

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