Sunday, May 9, 2021

हमकदम

एक फ़िक्र उसकी ही थी ज़माने में l
ख़ैरियत बदली नहीं कभी फ़साने में ll

दुआओं के अम्बर में फ़रियाद थी साँसों की l
मंत्र मुग्ध सुध बुध खो जाती राहों में उनकी ll 

कमसिन सा था यह सानिध्य अगर l
लटों में उलझा हिज़ाब था उस नज़र ll

राज छुपाये पुकार थी अंतर्मन की कोई l 
हर नज्म हसीन बने उनके साये जैसी ll

साथ कदम दो कदम उनके चलते कैसे l
मेहर में चाँद को नज़राना चाँद का देते कैसे ll 

सिफ़ारिश की थी सितारों से हमने उस घड़ी l
महफ़िल सजा रखी थी घटाओं ने उस घड़ी ll
 
ओझल था चाँद जाने कौन से झुरमुट बीच l
छोड़ गया यादें बस उन फरियादों के बीच ll

स्पर्श उनकी अनकही मीठी मीठी बातों का l 
छू जाती दिल के तारों को हमकदम जैसे कोई ll

21 comments:

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    1. आदरणीय शिवम् जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर

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  2. ओझल था चाँद जाने कौन से झुरमुट बीच l
    छोड़ गया यादें बस उन फरियादों के बीच ll
    .. सुंदर यादों का नजराना पेश करती नायाब रचना ।

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    1. आदरणीया जिज्ञासा दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर

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  3. साथ कदम दो कदम उनके चलते कैसे l
    मेहर में चाँद को नज़राना चाँद का देते कैसे ll
    अति सुन्दर ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर

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  4. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (11 -5-21) को "कल हो जाता आज पुराना" '(चर्चा अंक-4062) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

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    1. आदरणीया कामिनी दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने एवं हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर

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  5. बहुत खूब मनोज जी, ह‍िंंदीऔर उर्दू के शब्दों का सफल संयोजन क‍िया आपने...दुआओं के अम्बर में फ़रियाद थी साँसों की ।
    मंत्र मुग्ध सुध बुध खो जाती राहों में उनकी ।।..वाह

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    1. आदरणीया अलकनंदा दीदी जी
      शुक्रिया तहे दिल से l
      सादर

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  6. एक फिक्र थी उसकी जमाने में
    खैरियत बदली नहीं कभी फसाने!
    वाह! बहुत ही खूबसूरत सर👌👌🙏🙏

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    1. आदरणीया मनीषा दीदी जी
      शुक्रिया तहे दिल से ल
      सादर

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  7. बहुत सुंदर

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    1. आदरणीय ओंकार जी
      आपका दिल से शुक्रिया
      सादर

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      Kind Regards

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  9. वाह! बहुत ही बढ़िया ।

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    1. आदरणीया अमृता दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के तहे दिल से शुक्रिया
      सादर

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  11. साथ कदम दो कदम उनके चलते कैसे l
    मेहर में चाँद को नज़राना चाँद का देते कैसे ll
    बहुत खूब ! मनभावन शेरों से सजी ग़ज़ल प्रिय मनोज | भावों के कई रंग नज़र आते हैं रचना में | हार्दिक स्नेह के साथ शुभकामनाएं

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    1. आदरणीया रेणु दीदी जी
      हौशला अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया
      सादर

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