Tuesday, August 2, 2022

निःशब्द

कहाँ से चला था कौन सी डगर का मुकाम था वो l

राहों की अधीर पगडण्डियाँ का सैलाब सा था जो ll


टूटे खंडहरों का आशियाँ था शायद जैसे कोई l

बिखरे ख्वाबों की लूटी अस्मत थी जैसे कोई ll


झंझोर था एक रुकी हुई दबी सी हल्की आहट का कहीं l

दस्तक दे रही जो निःशब्द अहसासों को कभी कभी ll


व्याकुल पपहिया छुपे पैगाम भेज रहा था जैसे कोई l

शब्द फिर भी पास ना थे उन सूखे हुए लबों के कहीं ll


बैचैन सावन की पुरवाई का रुख जुदा था खुद से कहीं कहीं l

रौनक ऐ महफिल का चाँद तन्हा खोया हुआ था और कहीं ll


इतनी भर साँसे अब तलक भी जो थी जिंदा बची खुची l

एक संदेशे इंतजार में धड़का जाती थी यह दिल कभी कभी ll

13 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना
    सादर

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    1. आदरणीया अपर्णा दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  2. हमेशा की तरह भावपूर्ण भावाभिव्यक्ति ।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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    1. आदरणीय यशवन्त भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 10 अगस्त 2022 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
    >>>>>>><<<<<<<
    पुन: भेंट होगी...

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    1. आदरणीया दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए तहे दिल से आपका आभार

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    1. आदरणीया यशोदा दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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    1. आदरणीया श्वेता दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  7. वाह! सुंदर रचना

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