Friday, September 8, 2023

प्रफुल्लित निंद्रा

तपती रेगिस्तानी रेत में छाले उभरे नंगे पांव में l

निपजी थी एक जीवट विभाषा इसके साथ में ll


बुलंद कर हौसलों को बढ़ता चल यामिनी राह पे l

विध्वंशी लू थपेड़े पराजित से नतमस्तक साथ में ll


मृगतृष्णा प्यासी इस धरोहर पिपासा रूंदन नाद में l

सुर्ख लहू भी जम गया बबूल की सहमी काली रात में ll


खंजर चुभोती तम काली घनी कोहरी डरावनी छांव में l

रुआँसा उदास अकेला रूह अर्ध चाँद परछाई साथ में ll


कुंठित मन व्याकुल अभिलाषा अधीर असहज वैतरणी नाच में l

धैर्य धर अधरों नाच रही फिर भी निंद्रा प्रफुल्लित अपने साथ में ll

14 comments:

  1. नींद का सच यही है

    बहुत अच्छी और सुंदर रचना
    बधाई

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    1. आदरणीय ज्योति भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  2. कुछ संस्कृतनिष्ठ और अन्य सुंदर शब्दों से सजी सुंदर रचना

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    1. आदरणीया अनीता दीदी जी
      आपका उत्साहवर्धन ही मेरी कूची के रंगों की सुनहरी धुप की मीठी बारिश हैं, आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

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    1. आदरणीय शिवम् भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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    1. आदरणीय सुशील भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  5. आशा और उम्मीद का संचार करता ... सुन्दर शेर सभी ...

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    1. आदरणीय दिगम्बर भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  6. बहुत-बहुत सुन्दर रचना गुरुजी

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    1. आदरणीय हरीश भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  7. बहुत सुंदर रचना,

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    1. आदरणीया मधुलिका दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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