Monday, October 2, 2023

उन्माद

इश्क में उसके बार बार हर बार उजड़ा हूँ l

दरख्तों के पतझड़ शायद सावन नहीं पास ll



टूट बिखरा इसकी फ़िज़ाओं अनगिनत बार l

दिल फिर भी ना सुने इन कदमों की आवाज ll



रंग वो दूर था कही ना जाने क्यों बादलों पार l

चाँद ने दाग तिल छुपा रखा जैसे कोई राज ll



उन्माद इश्क नचा रहा हर चौबारे की गली गली फांस l

घुँघरू की तरह बजता गया उसके कदमों धूलो आस ll



सब्र इम्तिहान उजड़ उजड़ बिखरता इश्क लहू साथ l

अश्कों प्रीत सागर गहराई समा गयी इसके साथ ll



सूराख आसमाँ इश्क आँचल छू गया दिल के तार l

बहक गया मन एक बार फिर बिखर जाने के बाद ll

8 comments:

  1. Replies
    1. आदरणीय सुशील भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

      Delete
  2. सब्र इम्तिहान उजड़ उजड़ बिखरता इश्क लहू साथ l

    अश्कों प्रीत सागर गहराई समा गयी इसके साथ ll,,,, बहुत सुंदर आदरणीय शुभकामनाएँ

    ReplyDelete
    Replies

    1. आदरणीया मधुलिका दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

      Delete
  3. मैं तो इस कदर उजड़ा हु की एक ब्लॉग ही बना लिया "उजड़ा पन्ना" 😅 बहुत बढ़िया लिखा है आपने।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीय शिवम भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

      Delete
  4. यह तलाश ही जीवन को आगे बढ़ाती है, सुंदर सृजन

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीया अनीता दीदी जी
      आपका उत्साहवर्धन ही मेरी कूची के रंगों की सुनहरी धुप की मीठी बारिश हैं, आशीर्वाद की पुँजी के लिए तहे दिल से नमन

      Delete