Friday, February 2, 2024

सजा

अविरल सिसकियाँ अंतर्मन पहेली पदचापों की l

प्रश्नन चिन्ह पानी तरंगों मचलती मझधारो की ll 


जिस्म सुनहरी झुर्रियां लिपटी रूह बिन बरसातों की l 

वात्सल्य खामोश अनकहे खोये हुए शब्द बातों की ll 


मसौदा लेखन अम्बर इस काफिर को आज़माने की l 

चिनार दरख्तों संग निपजी वो सफर मुलाक़ातों की ll 


आराधना रीत सूनी वेदना कोरे फागन रंग साधना की l

उजाड़ती मत असहमत गुलज़ार गलियां बारातों की ll


सब्र सदियों आईना गर्त उस इंतजार की l

खुशफहमी गलतफहमी इस नादानी की ll


कल्पना भँवर टूटा ना जब दिल लगाने की l

चाह थी उस चाँद की नजर बन जाने की ll


कैसे भूल जाऊँ हवा उस गली चौबारे की l

आदत हैं जिसको सिर्फ दिल लगाने की ll


रब ने दी थी मोहलत मोहब्बत में जी जाने की l

मयकशा छलका गया सजा इसे जी जाने की ll

8 comments:

  1. आदरणीय सुशील भाई साब
    सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  2. आराधना रीत सूनी वेदना कोरे फागन रंग साधना की l

    उजाड़ती मत असहमत गुलज़ार गलियां बारातों की ll

    वाह! बहुत ही सुन्दर सृजन 🙏

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    1. आदरणीया कामिनी दीदी जी
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  3. वाह! बहुत सुन्दर भावविभोर रचना।

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  4. आदरणीया रूपा दीदी जी
    ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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  5. अविरल सिसकियाँ अंतर्मन पहेली पदचापों की l

    प्रश्नन चिन्ह पानी तरंगों मचलती मझधारो की ll बहुत सुंदर शेर हैं,ह्रदय स्पर्शी,आदरणीय आपकी लेखनी वैसे भी कमाल की है ।

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