कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l
मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया ll
बेख्याली काफिर नींदों दुनिया को ख्वाबों खिलोनों रूप दे आया l
शून्य मझधार कठपुतली स्वाँग रचा दर्पण प्रतिबिंब रूप दे आया ll
खुशबु चंदन सजा भस्म चिताओं सौदा आकंठ लालच से कर आया l
हुनर जौहरीयों को टूटे आईने स्वप्निल चमकता इश्तहार बेच आया ll
अनुबंध टूटा जो साँसों से बंजारी धड़कनों को दफन कर आया l
ख्यालों अह्सास परे जिंदा मुर्दों को मुर्दों का श्मशान बेच आया ll
हर पायदान कहानी नई बुन ठगों बीच सूनी सी पदचाप छाप छोड़ आया l
आहट द्वारे मोक्ष कांपते हाथों रूहों तिलांजलि दे अशर्फीयाँ खरीद लाया ll
सुंदर
ReplyDeleteआदरणीय सुशील भाई साब
Deleteआपका तहे दिल से शुक्रिया
Wahhh
ReplyDeleteआदरणीय वर्मा भाई साब
Deleteआपका तहे दिल से शुक्रिया
गहन भावाभिव्यक्ति.
ReplyDeleteआदरणीया मीना दीदी जी
Deleteआपका तहे दिल से शुक्रिया