Thursday, May 7, 2026

आलिंगन

तू ही मेरी वो पाठशाला जिस नदी का मैं ठहरा हुआ किनारा l

संभली नहीं किताब वो कभी अक्स तेरा जिसमें लगे पुराना ll


पेंसिल से नाम मेरा लिख मिटाना दूरियाँ चाँद फासलों समझाना l

लिखावट सी बन गयी वो मेरी साँसों रूह ज़िल्द कागज पन्नों की ll


बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l

अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll


तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l

अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll


रेखा लकीरें छांव सी यादें मुलाकातें तेरे सूखे गुलाब खुशबु की l

मधुशाला कस्तुरी बन गयी वो मेरी आलिंगन अलबेले साँझ की ll

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