Saturday, April 18, 2026

पारिजात

अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l

कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll


ललाट पर बिंदी की वो मोहर गालों की रुखसार बताया करता हूँ l

बालियों की धड़कनों से उसकी लहराती केश लट्टे उलझाया करता हूँ ll


नमी उसके आँखों की अपने काजल से पलकों बंद कर लेता हूँ l

डोरी उसके दिल पतंगों की दूसरी मांझे पेंचो से बचाया करता हूँ ll


तारूफ सुन उस चाँद की पता पूछने लगा आसमाँ चाँद भी l

कहा ठहर कोरी कल्पना नहीं घूंघट हटा दिख जायेगा पास अभी Il


तूने इत्र सा महकाया आँचल छोर बना राधा प्रेयसी रूप जिसका l

ये चाँदनी सहेली पता ना पूछ उस पागल चितचोर दिल तरन्नुम का ll

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