अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l
कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll
ललाट पर बिंदी की वो मोहर गालों की रुखसार बताया करता हूँ l
बालियों की धड़कनों से उसकी लहराती केश लट्टे उलझाया करता हूँ ll
नमी उसके आँखों की अपने काजल से पलकों बंद कर लेता हूँ l
डोरी उसके दिल पतंगों की दूसरी मांझे पेंचो से बचाया करता हूँ ll
तारूफ सुन उस चाँद की पता पूछने लगा आसमाँ चाँद भी l
कहा ठहर कोरी कल्पना नहीं घूंघट हटा दिख जायेगा पास अभी Il
तूने इत्र सा महकाया आँचल छोर बना राधा प्रेयसी रूप जिसका l
ये चाँदनी सहेली पता ना पूछ उस पागल चितचोर दिल तरन्नुम का ll
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