Tuesday, August 4, 2026

रोती बारिश

तालीम सावन नयी सीखा गयी नीलामी मुनादी सौदागरी को l

रात परछाई बारिश बूँदें बेच आयी रोते खारे आँसू पानी को ll


बादलों अमिट छाप थी उसके अर्ध चाँद हुनरमंद कलाकारी को l

मोल समझ ना पायी जुल्फें इसकी पलकों रिसते खारे पानी को ll


बिन रूह जिस्म को भा गयी तंग गलियाँ इसके आँगन को l

दागों अनगिनत पैबंद कढ़ी इसके एकांकी एकांत साये को ll


किनारा कर आसमाँ आँचल बाँध दिया रोती बारिश यादों तन्हाई को l

टकरा काँच दीवारों से थम गया शोर इसका उफनते बारिश पानी को ll


नजरबंद थी तमाशबीन रोती आँसू आँखें सावन की परछाई को l

चाँद शांत हृदय भीगता रहा ताउम्र अपने ही खुदगर्ज फ़साने को ll

1 comment:

  1. मार्मिक भावाभिव्यक्ति ।

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