सुबह की अजान पे
खुली जब आँख
आया तेरा ही ख्याल
रहे सलामत मेरा प्यार
खुदा मेरे मेरी ये दुआ
तुम कुबूल फरमाना
मेरे महबूब को
मेरे दिल के पास ही रखना
सुबह की अजान पे
खुली जब आँख
आया तेरा ही ख्याल
रहे सलामत मेरा प्यार
खुदा मेरे मेरी ये दुआ
तुम कुबूल फरमाना
मेरे महबूब को
मेरे दिल के पास ही रखना
एक तो हलकी बूंदों की छम छम
उसपे भीगे लब तेरे
देख इस शबनमी काया को
घायल कैसे ना दिल हमारा हो
बड़ी नफासत से दिल के कोरे कागज़ पर
कुछ अल्फाज आप के सजदे में लिखे
संग दिल सनम ने पैगाम का जबाब लिखा
लिखावट है आप की
पर अल्फाज किसी ओर के
इसलिए आपसे फिर प्यार कैसे हो
जब कभी मन हुआ रोने को
बारिस में निकल पड़ा
वर्षा की बूंदों में आंसू घुल गए
किसीको ख़बर भी ना हुई
हम रो के घर अपने चले गए